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फिजिकल कोर्ट पर वकीलों की राय एक नहीं

Ritu Rani

ByRitu Rani

Oct 27, 2020

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हाई कोर्ट में फिजिकल सुनवाई को लेकर अब वकील भी अलग अलग गुट में बंट रहे हैं । कुछ का मानना है कि वर्चुअल और फिजिकल दोनों कोर्ट साथ में चलाना संभव नहीं है । कोर्ट की सुनवाई यह तो वर्चुअल होनी चाहिए या तो फिजिकल होनी चाहिए । जबकि कुछ वकीलों का मानना है कि कोर्ट की सुनवाई सिर्फ फिजिकल होनी चाहिए ।

झारखण्ड हाई कोर्ट ने फिजिकल कोर्ट शुरू करने की तैयारी को लेकर नोटिस जारी किया है । हाई कोर्ट ने वकीलों से विकल्प मांगा है । कोर्ट ने कहा है कि लंबित मामले में दोनों पक्ष यदि फिजिकल सुनवाई चाहते हैं तो उन्हें इसका उल्लेख कर मेंशन स्लीप देना होगा । इसमें दोनों पक्षों की सहमति अनिवार्य होगी । दो नंबर से दायर होने वाले नए मामलों में अधिवक्ताओं को यह बताना होगा कि वह अपने मामलों की सुनवाई वर्चुअल चाहते हैं या फिजिकल चाहते हैं कोर्ट में ।

हाई कोर्ट के वकीलों का कहना है कि राज्य में सभी कार्यालय में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ काम शुरू हो गया है । ऐसे में कोर्ट को भी पूरी तरह फिजिकल किया जा सकता है । जबकि कुछ वकीलों का कहना है कि दोनों तरह से सुनवाई करने में परेशानी आ सकती है । किसी मामले में यदि एक वकील वर्चुअल और दूसरा वकील फिजिकल कोर्ट में सुनवाई करना चाहते हैं तो इसमें दिक्कत आ सकती है । इस तरह से हाई कोर्ट को दोनों तरीके से कोर्ट चलाने में आसानी नहीं होगी ।

उधर झारखण्ड हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसियेशन ने हाई कोर्ट के नोटिस के बाद अभी तक आधिकारिक रूप से कुछ भी नहीं कहा है । एसोसिएशन सभी सदस्यों से राय लेने के बाद इस मामले पर अपना पक्ष रखेगी ।

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