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व्यवस्था प्रणाली : भ्रष्टाचार का दूसरा रूप

Ritu Rani

ByRitu Rani

Dec 30, 2020

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आज का जो दौर है रोज हम कुछ ना कुछ ऐसी खबर पढ़ते ही हैं , जो भ्रष्टाचार का रूप ले लिया है । आए दिन ऐसी खबर सुनने को मिलती रहती है , जिसकी वजह से लोगों का भरोसा सरकार पर से उठते चला जा रहा है । यहां तक कि लोगों को अच्छाई , व्यवस्था प्रणाली से भी धीरे धीरे भरोसा उठती जा रही है । अब ऐसी ऐसी घटनाएं हो रही है कि लोग पढ़ने से भी डरने लगेंगे । इन सब का एक ही कारण है , जिसे हम कहते हैं दुर्नीति । अनुशासन की कमी की वजह से ही भारत में सब कुछ विफल ही रहा है । कल की ही बात है , रविवार को 11 बजे टीसीएस ion डिजिटल तुपुदाना , रांची में स्नैप ( Snap ) की परीक्षा केंद्र के निकट पार्किंग क्षेत्र में 25 स्कूटी के डिकी ( Dickey ) से मोबाइल फोन , जरूरतमंद डॉक्यूमेंट्स , पर्स और रुपयों की चोरी अज्ञात चोरों द्वारा की गई है । इस तरह की घटनाओं के बाद विद्यार्थी परीक्षा केंद्र की चयन करने में भी हिचकिचाएंगे और परीक्षा देने में ध्यान भी केंद्रित नहीं कर पाएंगे ।

विद्यार्थी इस कोरोना महामारी में बहुत मुश्किल से परीक्षा देने आए हुए थे । परीक्षा देकर बाहर निकलते ही पार्किंग क्षेत्र की ओर बढ़ते ही उन्हें ज्ञात हुआ कि उनके स्कूटी के डिकी से जरूरतमंद चीजों की चोरी हो गई है और ये चोरी एक परीक्षा केंद्र के पार्किंग क्षेत्र से हुई जहां पर सुरक्षा की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए । अगर ऐसी स्थिति में इससे बड़ी घटना घटती तो इसके जिम्मेदार किसे ठहराया जाएगा ?

विद्यार्थियों को इसकी खबर होते ही विद्यार्थियों ने एफआईआर दर्ज कराया , लेकिन इसके खिलाफ कोई कठोर करवाई नहीं की गई । जिसकी वजह यह है कि विद्यार्थियों की पहुंच उच्च स्तर तक नहीं है या प्रशासन इन घटनाओं में अपनी कामचोरी छिपाना चाहती है । जो कुछ भी हुआ परीक्षा केंद्र पर विद्यार्थियों के साथ , इसकी जड़ कहीं न कहीं भ्रष्टाचार ही है क्योंकि भ्रष्टाचार चोरी में छुपी है । हो सकता है अन्य घटना के मुकाबले ये घटना बहुत बड़ी ना हो , लेकिन विद्यार्थियों की जो चीजें चोरी हुई है , वो चीजें उन विद्यार्थियों के लिए बहुत कीमती थी और उन डॉक्युमेंट्स को तैयार करने में भी काफी वक्त लगता है । इन सारी चीजों की दोबारा उपलब्धता में बहुत मुश्किल होती है ।

हर कोई सिर्फ और सिर्फ व्यक्तिगत जीवन के बारे में सोचता है । किसी को जातीय जीवन से मतलब नहीं है । अगर कोई इंसान जातीय जीवन के बारे में सोचता तो इस तरह की घटनाएं नहीं होती । जिस वजह से व्यवस्था प्रणाली में ढीलापन आ गया है । इसी ढीलेपन व्यवस्था प्रणाली के परिणाम स्वरूप इस तरह की घटनाएं आए दिन होती रहती हैं और अपराधियों को हिम्मत और बढ़ावा मिलती रहती है ।

ये जो विद्यार्थियों के साथ जो भी हुआ परीक्षा केंद्र में , जहां पर उनकी चीजें गायब थी , हो सकता है कल को इससे बड़ी बड़ी घटनाएं घट जाएं । ऐसे में सबसे मुख्य बात यह है कि अगर वहां पर परीक्षा हो रही थी , उसकी सुरक्षा के लिए व्यवस्था क्या थी ? अगर वहां पर कोई व्यवस्था नहीं थी तो क्यों नहीं थी ? अगर कोई व्यवस्था था तो किस तरह का था , जो पार्किंग क्षेत्र से चोरी हो गई ? कौन कौन से लोग थे जो सुरक्षा की जिम्मेदारी लिए हुए थे और जांच क्यों नहीं हुई या फिर प्रशासन की चोरों के साथ कोई मिलीभगत थी ? प्रशासन की बदनामी होगी , जिस वजह से ध्यान नहीं दिया गया या उन्होंने कुछ किया ही नहीं । इसकी जानकारी हमें तो नहीं है लेकिन जितना हमें पता है एक छात्र की तरह , वहां पर कड़ी सुरक्षा होनी चाहिए थी , सिक्योरिटी गार्ड की व्यवस्था होनी चाहिए थी । अगर पार्किंग के लिए कोई शुल्क की भुगतान करनी थी तो वो भी एक छात्र को मान्य होता है ताकि उनकी चीजों की सही देखभाल हो । सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था होनी चाहिए थी इसलिए किसी भी जगह को परीक्षा केंद्र बनाना है तो उसके लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए ताकि विद्यार्थी शांत मन से परीक्षा देने में सफल हो । जब तक बात अपने तक नहीं आती है , तब तक कोई ध्यान नहीं देता है । अगर लोग राष्ट्रीय के लिए सोचने लगे तो इस तरह की घटनाएं सुनने को नहीं मिलेंगी ।

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