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Arpit Kumar

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क्या भारत नैतिक संकट या आर्थिक संकट का सामना कर रहा है

सर्वप्रथम नैतिक संकट की बात करें तो देश के सामने तमाम वह नैतिक चुनौतियों व्याप्त है। समाज में विभिन्न स्तर पर विभेदीकरण, छुआछूत, जातिवाद, स्त्री उत्पीड़न, धार्मिक रूढ़िवादिता, नीतिगत निर्णयन…

अनिश्चितता प्रगति की प्रतिद्वंद्वी है

प्रगति अमूल्य है। वस्तुत: आज का मानव प्रगति की ही उपज है । आज से हजारों वर्ष पहले मानव का रूप, रंग आकार बिल्कुल भिन्न था । यह जीने की…

लोकतंत्र में सोशल मीडिया की भूमिका

कोविड -19 महामारी के दौरान हमने देखा कि कैसे सोशल मीडिया के जरिए आम नागरिक एक दूसरे की सहायता कर सकते हैं एवं संकट से निपटने में आधुनिक सरकारी  प्रयासों…

नारीवाद सबके लिए है

नारीवाद की एक आम परिभाषा है कि महिलाओं को समान सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकार और अवसर दिए जाने चाहिए। नारीवाद का उद्देश्य यह बिल्कुल नहीं है कि हमें किसी…

कहीं गरीबी खतरा है और कहीं समृद्धि

गरीबी बहुआयामी है। यह हमारी कमाई के अलावा स्वास्थ्य, राजनीतिक भागीदारी और हमारी संस्कृति और सामाजिक संगठन की उन्नति पर भी असर डालती है। अटल बिहारी वाजपेई गरीबी संसार के…

प्रगतिशील राष्ट्र में जातिवाद एक लगाम है

भारतीय राजनीति की मुख्य विशेषता है: “परम्परावादी भारतीय समाज में आधुनिक राजनीतिक संस्थाओं की स्थापना।’’ स्वाधीनता प्राप्ति के पश्चात् भारतीय राजनीति का आधुनिक स्वरूप विकसित हुआ । अत: यह सम्भावना…