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कोरोना : एक महामारी या हथियार

Arpana Kumari

ByArpana Kumari

Oct 30, 2020

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कोरोना ने जिस तरह इस दुनिया में आतंक फैलाया है उससे हर इंसान आज खौफ में है। हम सब इससे अपनी जान बचाने में लगे हैं। और हों भी क्यों ना, जो इंसान कोरोना वाइरस का गम्भीर शिकार बन जाता है, उसकी ज़िन्दगी बचाना मुश्किल है। और अब तो दुनिया भर में करोड़ो लोग इस वाइरस का शिकार हो चुरे हैं, और लाखों इससे जान गवा चुके हैं।
कोरोना नाम आपने 2020 में ही सुना होगा। बहुत कम लोग होंगे जिन्हें इस बात की जानकारी होगी की 1960 में अमेरिका के एक सैनिक परीक्षण का नाम कोरोना था। जिससे अमेरिका जासूसी करने में लगा था। यह अमेरिका का पहला कामियाब उपग्रह था।

इस सैनिक परीक्षण में कुल मिलाकर 144 कोरोना उपग्रहों को इस्तेमाल किया गया था। जिनमें से 102 उपग्रह महत्वपूर्ण तस्वीरें अमरीकी सैनिकों को भेज पा रहे थे। इन तस्वीरों से अमेरिका को आने वाले जंग में काफी मदद मिली। यह जासूसी उपग्रह चीन और कुछ पष्चिम एशिया के देशों से जानकारी हाँसिल करने के लिए उपयोगी साबित हुए।

फिलहाल 2020 में भी हमें पृथ्वी पर जंग का माहौल दिखाई दे रहा है। यह कहना गलत नहीँ होगा कि चीन और अमेरिका जंग में आमने सामने हैं। और हम सब जानते हैं कि कोरोना चीन की पैदाइश है। पर सवाल यह खड़ा होता है कि क्या कोरोना जंग में इस्तेमाल होने वाला एक हथियार है? क्या यह चीन के लिए एक बदला है? या क्या सिर्फ एक गलती है जिसकी वजह से एक बिमारी ने महामारी का रूप ले लिया?

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