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कोरोना काल

Sabana Praween

BySabana Praween

Sep 29, 2020

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कोरोना वायरस बीमारी पूरी दुनिया में महामारी के रूप में सामने आई है। यह covid-19 चीन देश के विहान शहर से उत्पन्न हुआ है। किसी ने यह भी कहा कि चीनियों के चमगादड़ खाने से यह बिमारी उत्पन्न हुई इसलिए कुछ लोगों द्वारा इसे चीनी बीमारी के नाम से भी जाना जाता है।वैसे इस बीमारी से पूरी दुनिया परेशान है। किसी को अभी तक इस बीमारी को खत्म करने के लिए कोई वैक्सीन , दवा नहीं मिल पाया है। हालांकि कई देश इस बीमारी के इलाज के लिए शोध कर रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी को इसमें सफलता हासिल नहीं हुई है।
हमारे भारत देश में कोरोना का पहला मरीज फरवरी माह में सामने आया जिसे सरकार ने गंभीरता से लिया, लेकिन फिर भी यह बीमारी महामारी का रूप धारण कर लिया और यह तेजी बढ़ता गया। जिसे देख कर सरकार ने कई कड़े कदम उठाए। सबसे पहले उन्होंने जनता कर्फ्यू लगाया। फिर हमारे देश के प्रधानमंत्री ने 21मार्च को देश में पहला लोकडॉउन लगाने का ऐलान किया जिसे जनता ने पूर्ण रुप से स्वीकार किया।लेकिन इस महामारी ने तो पूरे देश को मजबूरन घरों में कैद कर दिया जिससे लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मानो इस बीमारी ने पूरे देश को रुकने पर मजबूर कर दिया। अब तो इस महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था अपने निचले स्तर पर आ चुकी है। इस महामारी ने वैसे तो सभी तबके के लोगों को परेशान किया, लेकिन सबसे ज्यादा हमारे देश के मजदूरों ने इस महामारी का सामना किया।इस लोकडॉउन में सबसे ज्यादा तकलीफ प्रवासी मजदूरों को हुई जो अपने घर लौटने को विवश हो गए थे । जहां वे लोग काम कर रहे थे, वहां से उन्हें निकाल दिया गया । रहने का अपना कोई ठिकाना नहीं होने के कारण उन्हें अपने गांव आने पर मजबूर होना पड़ा। लेकिन इस लोकडॉउन के वजह से वह अपने घर जाएं तो जाएं कैसे ? पेट की भूख को मिटाएं कैसे? पेट की भूख ने उन्हें पैदल चलने पर मजबूर कर दिया। वे सभी अपने गांव लौटना चाहते थे पर पूरे देश में लोकडॉउन के वजह से जाने का कोई साधन उपलब्ध ना होने पर वे अपने गांव पैदल जाने पर मजबूर हो गए।

क्या सरकार ने लोकडॉउन लगाने से पहले इन प्रवासी मजदूर के बारे में सोचा था ? अगर सोचा था तो मजदूर पैदल चलने को मजबूर क्यों ? इस सवाल का जवाब तो वे मजदूर ही दे पाएंगे जिन्होंने इस बीमारी का सामना मीलों पैदल दूर-दूर चलकर किया। इस दौरान कई मजदूर अपनी जान को भी हार गए हैं।हालांकि सरकार ने अपने हद तक उनकी मदद तो की परंतु वह काफी नहीं था, सरकार ने उनकी भूख मिटाने के लिए कुछ सहयोग प्रदान किया। इस बीमारी से लड़ने का हौसला तो इन सब मजदूरों से भी मिला जहां कुछ मजबूरियां थी बाहर निकलने की वहीं कुछ लोगों ने इस बीमारियों का मजाक में लिया था। उन्हें इस बात का डर नहीं था कि देश एक ऐसी बीमारियों से लड़ रहा है जो महामारी का रूप ले चुका है बल्कि उन्हें उस पुलिस से डर था जो बाहर डंडे लेकर खड़े थे। इस वायरस में भी लोगों में एकजुटता दिखी हमारे देश के डॉक्टर कर्मी, पुलिस कर्मी, सफाईकर्मी इत्यादि कर्मियों ने मिलकर इस वायरस से लड़ने का ठाना अभी भी वायरस के केस बढ रहे हैं। इसके लिए लोगों को जागरूक रहना होगा। डब्ल्यूएचओ (WHO)द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा ,विभिन्न डॉक्टरों द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा, अपने आसपास साफ-सफाई आदि का पालन करना होगा। लोगों को एक दूसरे से कम से कम 1 मीटर की दूरी बना कर रहने का निर्देश दिया गया है। इस पर विभिन्न कवियों ने कविताएँ भी लिख कर लोगोंको जागरूक किया है ।:

“दूरी बहुत जरूरी है “
(इंसानों को इंसानों से जो दूर करें ये कैसी मजबूरी है। जिन्दा रहने के खातिर पर दूरी बहुत जरूरी है ।
सब तामझाम संधान लिए , जाने कैसी तैयारी है ।
जो कर्मकाण्ड को त्यागेगा , वही जीने का अधिकारी है ।
निष्काम भाव से काम त्याग कर , अब घर ही सबकी धुरी है ।
जिन्दा रहने के खातिर अब , दूरी बहुत जरूरी है। )

इस बीमारी का जल्दी खात्मा हो इसके लिए वैक्सीन निकालने पर प्रशिक्षण हो रहा है। इस वायरस की वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर हुआ है। लाखों करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए हैं, उद्योगों के बंद होने से उनकी रोजगार छीन गई है। पूरे देश में लोकडॉउन के वजह से आयात -निर्यात पर काफी असर हुआ है।

कोरोनी के दुष्परिणाम :

़लोगों को बेरोजगार होना पड़ा।

़देश की अर्थव्यवस्था चौपट नजर आई।

़निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।

़ शिक्षा के क्षेत्र ,व्यापार का क्षेत्र आदि ठप हो गए ।

जहां इस बीमारी की वजह से बहुत से नुकसान हुए हैं वहीं कुछ -कुछ लाभ भी देखने को मिले हैं।:

़हमारे देश के पर्यावरण की स्थिति तो पहले से ही बहुत ही दुषित था जो इस बीमारी के आने के बाद पर्यावरण की दशा में शुद्ध साबित हुआ।

ंबहुत से नदियों का पानी दूषित था। उसमें से गंगा नदी भी थी, जिसको साफ स्वच्छ बनाने के लिए देश के प्रधानमंत्री तथा अन्य बहुत से नेताओं द्वारा कोशिश की जा रही थी, लेकिन वह पूर्ण रुप से शुद्ध या स्वच्छ नहीं हो पा रही थी। लेकिन कोरोना काल में नदियों का पानी स्वच्छ हुआ।

़ओजोन परत में छिद्र दिखाई देने लगे थे, जो नुकसान दे था । वह छिद्र अब समाप्त हो गया। इस बीमारी के वजह से भारत को बहुत सारी नुकसानो का सामना करना पड़ा वहीं कुछ – कुछ लाभे भी प्राप्त हुई। अब भारत के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि इस बीमारी की वजह से जो अर्थव्यवस्था में आर्थिक स्थितियों में, बेरोजगारीयो में, आदि की मात्रा में जो कमी हुआ है,लोगों के स्वास्थ्य आदि जैसे समस्याओं का जल्द से जल्द समाप्त करें जिससे भारत की जो बिगड़ी अर्थव्यवस्था है, वह फिर से अच्छी अर्थव्यवस्था में तब्दील हो सके।

कभी सोचा ना था .. ऐसा वक़्त भी आयेगा

प्यारे दोस्तों से मिलने से भी मन कतरायेगा।
बाजारों की रौनक यूँ समाप्त हो जाएगी।
कहीं आने -जाने पर  ऐसे प्रतिबंध हो जाएंगा

कभी सोचा ना था, ऐसा वक्त  भी आएगा ।
लोगों से लोग दूर होते जा रहे हैं।
सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से अपना व्यापार बढ़ा रहे हैं।
घरों से बाहर निकले बिना ,घर से ही अपना काम निपटा रहे।
कभी सोचा ना था, ऐसा वक्त भी आएगा

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