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डीयू: इस बार ईसीए कोटे में ट्रायल के बिना दाखिल होगा

Vasundhara Vatham

ByVasundhara

Sep 30, 2020

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कोरोना की वजह से झांसी कूल कॉलेज बंद है और इस बार दाखिला प्रक्रिया में भी देरी हुई है, वही कोरोना को ध्यान में रखते हुए डीईओ ने इस बार ईसीए कोटे में ट्रायल के बगैर ही दाखिला लेने का फैसला किया है उच्च न्यायालय ने डीयू के फैसले पर मुहर लगाते हुए बिना ट्रायल के दाखिले को हरी झंडी दी है।

दाखिले के लिए छात्रों द्वारा जमा कराए जाने वाले मई 2017 से अप्रैल 2020 तक मिले तीन बेस्ट अचीवमेंट प्रमाण पत्र के मूल्यांकन के आधार पर होगा। जस्टिस जयंत नाथ ने कई छात्रों की ओर से दाखिल याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह फैसला लिया है। छात्रों द्वारा दी गई याचिका में डीयू द्वारा ट्रायल के बगैर ही इसलिए कोटे में दाखिला कराने के फैसले को चुनौती दी गई थी उच्च न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद माना है कि कोरोनावायरस के चलते भौतिक ट्रायल करा पाना मुश्किल है।

न्यायालय ने डीयू के उस दलील को भी स्वीकार किया जिसमे कहा था कि संसाधन के अलावा अभाव में इस श्रेणी में दाखिला लेने के लिए ऑनलाइन ट्रायल भी मुश्किल है। दाखिले के लिए छात्रों को पांच प्रमाण पत्र जमा कराने थे। इनमें से तीन बेहतरीन प्रमाण पत्रों में मिले अंकों के आधार पर छात्रों को दाखिला दिया जाएगा।

डीयू पहले दाखिले के लिए प्रमाण पत्र पर कम अंक देता था और ट्रायल में किए गए प्रदर्शन पर अधिक अंक देता था लेकिन इस बार डीयू ने बदलाव किया है डीयू में दाखिले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अबकी बार ईसीए कोटे के तहत दाखिले देते समय ट्रायल नहीं लिया जाएगा कोरोनावायरस यह फैसला लिया गया है इस साल सहभागिता या प्रतियोगिता में पुरस्कार के लिए 44 अंक प्रशिक्षण और परीक्षा के लिए 28 अंक कार्यशाला के लिए 16 अंक तथा प्रदर्शन या प्रदर्शनी की प्रस्तुति के लिए 12 अंक दिए जाएंगे आवेदन के सर्टिफिकेट को 100 अंकों के पूर्ण के आधार पर आप आ जाएगा।

न्यायालय की जगह शैक्षणिक मामलों में विशेषज्ञों को निर्णय ले

न्यायालय ने कहा कि अदालतों के लिए यह बेहतरीन और सुरक्षित होगा कि शैक्षणिक मामलों में दखल देने के बजाय इसके विशेषज्ञों को निर्णय लेने के लिए छोड़ दिया जाए न्यायालय ने कहा कि विशेषज्ञ इस में आने वाली समस्याओं से बखूबी रूबरू रहते हैं और आसानी से इसका समाधान भी निकाल लेते हैं न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व के फैसले का हवाला देते हुए यह टिप्पणी की है।

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