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निकास प्रणाली की सच्चाई

Arpana Kumari

ByArpana Kumari

Nov 4, 2020

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क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है, कि सड़क के किनारे चलते हुए आपको गटर की बदबू आने लगी हो? या गाड़ी चलाते वक़्त इस कारण आपको अपना शीशा बन्द करना पड़ा हो?
उस वक़्त कितना गुस्सा आता है ना देश पर? तब पता चलता है कि कितने निकम्मे हैं लोग, सफाई का काम भी ढंग से नहीँ कर पाते।

गंदे नाले की सच्चाई

क्या आपको पता है कि जिस नाले में जाकर लोग सफाई करते हैं वो असल में कितना हानिकारक है? और क्या आप यह जानते हैं कि हर साल इस काम में लगभग 600 लोगों की जान चली जाती है? और यह ऐसी खबरे हैं जो ना अखबारों में छपती है, और ना ही इन शहीदों के लिए श्रधान्जली दी जाती है।

1993 में इन्सानों द्वारा गटर साफ करने पर रोक लगाई गई थी। 2013 में इसे कानुनी ज़ुर्म ठहरा दिया गया था। इसका अन्जाम?
आज भी यह काम इन्सानों द्वारा कठिन परिस्थिति में होता है, और सरकार इसपर कोई कड़े कदम लेती नहीँ दिख रही।

इन गंदे नालों में जाकर सफाई करने वालों कि एक सच्चाई यह भी है कि सभी दलित परिवार से हैं। इन्हें न ही समाज में इज़्ज़त मिलती है और न ही ज़्यादा पैसे दिये जाते हैं।

टेक्नोलॉजी की दुनिया

आजकल हम टेक्नोलॉजी से कितने घिरे हुए हैं, हमारे फोने से लेकर वॉशिंग मशीन तक। हर साल नए नए खोज होते हैं। नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है हमारे लिए तरह तरह के ज़रूरतमन्द चीज़ें बनती हैं।
इस टेक्नोलॉजी की दुनिया में क्या सफाई कर्मचारिओं के लिए कोई जगह नहीँ? इस सफाई के लिए पर्याप्त मशीनें नहीँ बनाई गई हैं, और बनाई भी गई हैं तो इस्तेमाल नहीँ होती।
मशीनों की बात तो दूर की है, उन सफाई कर्मचारियों को उप्युक्त सुविधाएँ भी नहीँ दी जाती ताकि मरने वाले लोगों की संख्या को कम किया जा सके।

पारिवारिक जीवन

इन कर्मचारियों का पारिवारिक जीवन इनके काम की वजह से नष्ट होने लगता है। परिस्थिति की वजह से जो कर्मचारी हैं वो खुशी ढूंढने के लिए शराब का इस्तेमाल करते हैं। हालाँकि इसके लिए हम उन्हें दोष नहीँ दे सकते, कोई भी इंसान जो पूरे दिन दूसरों के मल मूत्र में खड़े होकर अपने हाथों से सफाई करे वो शाम होते ही साधारण जीवन कैसे बिता सकता है?
और ज़ाहिर सी बात है जो दिन भर काम करे और शाम को नशा करे, वो अपने परिवार को कैसे समय दे सकेगा?

इस विषय पर ऊंचे स्तर में ज़्यादा चर्चा नहीँ होती और न ही कोई इसे बड़ा मुद्दा मानता है, पर यह एक अमोघ सत्य है जो हमें सामने लाना होगा। हमें इन लोगों की परिस्थिती के बारे में सोचना होगा और इसे जल्द से जल्द सुधारना होगा।

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