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भारत में शिक्षा के स्थापक मोलाना अब्दुल कलाम आज़ाद

Aduiti Shreya

ByAduiti Shreya

Nov 11, 2020

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तब से अभी तक पूरे ग्यारह सौ साल बीत चुके हैं। भारत की जमीं पर जितना बड़ा हिंदू धर्म है, उतना बड़ा ही इस्लाम धर्म भी है। यदि हिंदू धर्म कई हजारों सालों से यहाँ के लोगों का धर्म रहा है तो इस्लाम भी यहाँ एक हजार साल से लोगों का धर्म रहा है। जैसे एक हिंदू गर्व के साथ कह सकता है कि वह एक भारतीय है और हिंदू धर्म का अनुसरण करता है, उसी तरह हम भी गर्व से कह सकते हैं कि हम भी भारतीय हैं और इस्लाम का पालन करते हैं। मैं इसे और भी विस्तार में ले जाना चाहता हूँ। एक भारतीय ईसाई उतने ही गर्व से यह कहने का हक़दार है कि वह एक भारतीय है और भारत में वह एक धर्म का पालन कर रहा है, जो ईसाई धर्म है |

-मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद


जैसे एक प्रधनाध्यापक अपने शिक्षण संसथान में धीरे -धीरे प्रगति लता है , उसी प्रकार गुरुकुल रूपी भारत वर्ष में मौलाना साहब द्वारा शिक्षा की नीव रखी गई |देश के प्रथम शिक्षा मंत्री का कार्य भार सम्हालते हुए उन्होंने देश में उचतरिया शिक्षा में प्रगति लाने अवं देश के विकास तथा युवा को कौशल बनाने का कार्य किया । मौलाना साहब द्वारा ईस्टर्न लर्निंग और लिट्रेचर में रिसर्च को बढ़ावा दिया और फाइन आर्ट्स के विकास के लिए तीन संस्थानों – संगीत नाटक अकादमी, साहित्य अकादमी और ललित कला अकादमी की स्थापना की । देश में अंग्रेजी सरकार द्वारा सत. ज़ेवियर ,आइआइटी रुड़की जैसे कई कान्वेंट स्कूल एवं संसथानो की स्तापना की गई थी । यह संस्थान वर्तमान स्थिति के लिए अनुकूल नहीं थे , तथा स्वतंत्र भारत के युवाओ की मांग को पूरी करने में असफल नज़र आरहे थे । इन परिस्थितियों को मद्दे नज़र रकते हुए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के टेक्निकल टर्म्स का हिन्दी में बड़े पैमाने पर संग्रह कराया गया । मौलाना आजाद ने ही कई महत्वपूर्ण बोर्ड / आयोग का गठन कराया, जिनमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), खड़गपुर इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन, द यूनिवर्सिटी एजुकेशन कमीशन, द सेकेंड्री एजुकेशन कमीशन, प्रमुख हैं। उन्होंने आईआईएससी, स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एण्ड प्लानिंग, जामिया मिलिया इस्लामिया और आईआईटी खड़गपुर की भी स्थापना की ।

बतोर शिक्षा मंत्री उनके 11 साल के कार्यकाल, जो की 15 अगस्त 1947 से 2 फरवरी 1958 तक रहा , इस 11 साल के कार्य कल में देश की शिक्षा निति बनाने , उसकी स्थापने करने अवं उसका सुचारु रूप से संचालन करवाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है ।
मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के इस महत्वपूर्ण योगदान को ध्यान में रखते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सन 2008 में उनके जन्म दिवस यानि 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में घोषित कर दिया था ।यह दिन शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है , क्योकि इस दिन देश में शिक्षा की स्थापना करने वाले मौलाना अब्दुल आज़ाद का जन्म हुआ था । इस दिन पुरे देश में विभन्न रंगा -रंगा कार्यक्रम आयोजित किये जाते हो और शिक्षा का पैगाम बाटा जाता है ।
जिस दिन देश का बच्चा बच्चा शिक्षित होगा उस दिन देश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता क्योकि जब देश पढ़ेगा तो देश बढ़ेगा |

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