• Tue. Dec 1st, 2020

Campus Beat

Independent Student News Organization

इमोजी: नए ज़माने के नए चेहरे

Vasundhara Vatham

ByVasundhara

Oct 21, 2020

Disclaimer: The views and opinions expressed in this article are those of the authors and do not necessarily reflect the views of Campus Beat. Any issues, including, offense and copyright infringment, can be directly taken up with the author.

एक समय था जब अपनों के चेहरे के हावभाव से उनके मन का हाल जान लिया करते थे, पर आधुनिकता के बढ़ते दौर में अपनों की मनोस्थिति को जानने के लिए हमें एक नई चीज दी है “इमोजी” आधुनिकता ने हमें अपने से दूर कर मार्ट फोन को हमारे हाथों में थमा कर अपनों के करीब रहने की सहूलियत दी हम अपने से दूर तो हुए पर अपनों के करीब भी रहे पर अपनों के चेहरों को पढ़ने की ललक हम मनुष्य में कम ना हुई डिजिटल दुनिया में चेहरों को पढ़ने की सुविधा आज भी मौजूद है क्योंकि हमारे डिजिटल मीडिया ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए इमोजी उपलब्ध कराएं कोई बुरा जोक सुनाकर चश्मा लगा और दांत निकले वाला इमोजी भेज दो, अपना प्यार जताने के लिए लाल दिल व चुंबन उछालने वाला ही भेज दो, दुखी हो तो आंसू निकलने वाला इमोजी है आपके दुख को व्यक्त कर देगा, किसी को बर्थडे विश करो और पार्टी इमोजी के सहारे पार्टी भी मांग लो अगर गुस्से से लाल हो तो लाल चेहरे वाला इमोजी है आपका गुस्सा दिखाने के लिए यहां तक कि आपकी नींद को भी व्यक्त कर देगा आपका ही इमोजी वह भाषा जो किसी भी बाधाओं को पार करके दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक आपकी बात आसानी से पहुंचा पाती है।
साफ तौर पर जब भावनाओं को व्यक्त करने की बारी आती है तो एक ही इमोजी हजार शब्दों से भी बेहतर साबित होता है इमोजी महज एक आइकन नहीं है अब यह डिजिटल दुनिया की भाषा है।
कहा तो यह भी जाता है कि इमोजी की शुरूआत 17वीं शताब्दी में ही हो गई थी. 2014 में अंग्रेजी वेबसाइट द अटलांटिक में छपे एक लेख में बताया गया कि 1648 की एक कविता मिली है जिसमें स्माइली का इस्तेमाल किया गया है. यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो प्रेस के पब्लिसिटी मैनेजर एडिटर लेवी स्टाल, काम के सिलसिले में रॉबर्ट हैरिक की कविताएं खंगाल रहे थे जिसमें ‘टू फॉर्च्यून’ नाम की एक कविता की दूसरी लाइन में उन्हें : ) बना हुआ दिखाई दिया. इससे यह सवाल उठने लगा कि क्या इमोजी का कारोबार 4 सदियां पुराना है.
मौजूदा दौर की बात करें तो पहला इमोजी 1999 में जापान के कलाकार शिगेटाका कुरिता ने बनाया था. कुरिता जापान की मोबाइल कंपनी डोकोमो के इंटरनेट प्लैटफॉर्म को तैयार करने का काम कर रहे थे. उन्होंने ऐसे 176 इमोजी तैयार किए जो साधारण तरीके से जानकारी पहुंचा सके. ये इमोजी फिलहाल न्यूयॉर्क के मॉडर्न आर्ट संग्रहालय के स्थायी संग्रह का हिस्सा हैं. कुरिता ने ऐसे कैरेक्टर तैयार किये थे जो मौसम का हाल (जैसे बादल, धूप, छतरी, बर्फ), ट्रैफिक (कार, ट्रैम, एयरप्लेन, जहाज़), तकनीक (लैंडलाइन, सेलफोन, टीवी) बता सके. लेकिन बात बस यहीं खत्म नहीं हुई. जानकारी से आगे बढ़कर बात दिल के हाल तक पहुंच गई. ❤ बनाकर दिल का बयां किया जाने लगा।

हर दिन लोग विभिन्न इमोजी का इस्तेमाल करते हैं। बोबल एआई की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीयों ने सबसे ज्यादा खुशी में आंसुओं के साथ हंसना और बोइंग किस वाले इमोजी का इस्तेमाल किया है। इसके अतिरिक्त टॉप टेन इमोजी की बात करें तो – स्माइलिंग फेस विद हार्ट आईज, किस मार्क, ओके हैंड, लाउडली क्राइंग फेस, बीमिंग फेस विद स्माइलिंग आईज, थम्स अप, फोल्डेड हैंड्स और स्माइलिंग फेस विद सनग्लासेस शामिल हैं।

Comments