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शिक्षा या व्यापार?

Sabana Praween

BySabana Praween

Sep 25, 2020

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silhouette of child sitting reading book behind tree during sunset

आज के समय में कोई भी व्यक्ति मानो अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। लोग आर्थिक लाभ कमाने के लिए किसी भी तरीकों को चुनना पसंद कर रहे हैं चाहे वह नैतिक तरीके हो या अनैतिक। ऐसी स्थिति किसी भी क्षेत्र में देखी जा रही है चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो या स्वास्थ्य का क्षेत्र।

हमारे देश में शिक्षा सेवाओं के निजी करण ने स्कूलों को उच्च किस्म का व्यापार बना दिया है। जहां लोगो द्वारा शिक्षा घरों को शिक्षा के मंदिर के नाम से जाना जाता था। आज रुपए पैसे के समक्ष व्यक्ति अपना ईमान बड़ी आसानी से बेचने को तैयार हो जाता है।

आज के समय में हमारे देश में स्कूलों व कॉलेजों में शिक्षा देने से ज्यादा उनसे शिक्षा के नाम पर लूट किए जा रहे हैं। आज जिस तरह प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ रहे हैं। वह शिक्षा के नाम पर बहुत से ऐसे योजनाएं कर रहे हैं कि वह बच्चों के माता-पिता से ज्यादा से ज्यादा पैसे ले सके। प्राइवेट स्कूल एनुअल चार्ज इत्यादि चार्जो के नाम पर बच्चों के अभिभावकों से काफी ज्यादा फीस ले रही है। जिसके कारण ग्रामीण या मध्यम परिवार के बच्चों की शिक्षा प्राइवेट स्कूल में नहीं हो पा रही है। आजकल बड़े-बड़े स्कूलों में शिक्षा के नाम पर डोनेशन लिए जा रहे हैं।आपको तो भारत के सरकारी स्कूलों की जानकारी तो है ही जिसमें पढ़ाई ना के बराबर होती है। हालांकि कई-कई जगहों में सरकारी स्कूल बेहतर प्रदर्शन करती नजर आ रही है। लेकिन बहुत से ऐसे भी जगह है जहां सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन कुछ खास नहीं है।

इसका कारण सरकारी स्कूलों के अध्यापकों के ढील, सरकारी अध्यापकों की ड्यूटी तो पोषाहार रजिस्टर पूर्ण करने में ही समाप्त हो जाती है। कहीं ना कहीं देखने को मिलता है कि अध्यापकों को खुद ही ज्ञान की कमी होती है तो ऐसी स्थिति में अभिभावकों को मजबूर प्राइवेट स्कूलों का सहारा लेना पड़ता है। प्राइवेट स्कूलों का व्यापार शिक्षा के नाम पर फलता फूलता जा रहा है। प्राइवेट स्कूल सरकारी स्कूलों की कमजोरियों का फायदा उठाकर अभिभावकों से मनमानी फीस वसूलते हैं। आज अभिभावक मजबूरन मनमानी फीस देने के लिए तैयार हैं। कई ऐसे भी लोग हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं वे अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में नहीं पढ़ा पाते हैं जिससे जिन बच्चों में अगर कोई टैलेंट है तो वह उभर कर नहीं आ पाता है।

अगर हमारे देश के सरकारी स्कूलों को अच्छी शिक्षा नीति योजनाओं से उभारा जाए तो शायद देश शिक्षा को लेकर काफी आगे बढ़ सकता है। हमारे राष्ट्रीय में ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक शिक्षा अच्छे स्तर तक बढ़ सकता है । अगर प्राइवेट स्कूलों के शिक्षा के व्यापार को कम करना है तो सरकार को सरकारी स्कूलों की शिक्षा पर ध्यान देना होगा। सरकारी शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह से उठा सके। इसके लिए कई कड़े कानून लागू करने होंगे। सरकारी शिक्षकों की नियुक्ति करने से पहले यह जांच करनी चाहिए कि उसकी शिक्षा कितनी है? क्या वे बच्चों को पढ़ा सकेंगे? इत्यादि बातों पर ध्यान देना चाहिए। जिससे सरकारी स्कूलों की शिक्षा के मामलों में जो दयनीय स्थिति है वे ठीक हो सके। आज दिल्ली तथा अन्य कुछ राज्यों के सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देने के योग्य बन रहे हैं। उसी तरह हर राज्य में ऐसी सरकारी स्कूलों का निर्माण हो सके और प्राइवेट स्कूलों का व्यापार बंद हो।

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