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सूक्ष्मता आपको धोखा दे सकती है; ईमानदारी कभी नहीं।

Devyani Marmat

ByDevyani Marmat

Jul 2, 2021

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brown wooden blocks on white table

सूक्ष्मता से तात्पर्य

सूक्ष्मता का अर्थ है छोटा या महीन रूप। समाज मे ऐसी छोटी छोटी व्यावहारिक बातों एवं कार्यो से है जो व्यक्ति को निम्न स्तर तक पहुँचा देती है। समाज मे एवं स्वयं की नजरों मे भी गिरा हुआ अनुभव करवाती है। जैसे, बईमानी, धोखा, हिंसा, कालाबाजारी आदि।

एक छोटी सी चूक भी हमारे जीवन का रुख पलट सकती है एक छोटी सी भूल हमे बईमान बना सकती है एक छोटा सा झूठ हमारे विश्वास को तोड़ सकता है।

ईमानदारी का आशय

ईमानदारी का आशय है सत्य की राह पर चलना और मन, वचन, कर्म, प्रेम, अहिंसा, अखंडता, विश्वास जैसे गुणों को अपनाना। इसे इंसानो का एक अहम गुण भी माना जाता है जिसको धारण करने से इंसान का वास्तविक रूप देखने को मिलता है। एक ईमानदार व्यक्ती कभी भी गद्दारी नहीं करता वह सदा वफादार रहता है। ईमानदारी को ना तो हम पढ़ सकते है नाही देख सकते हैं और नाही छू सकते है इसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है।

“ईमानदारी और निष्पक्ष आचरण जीवन का रहस्य हैं”

ईमानदारी आखिर क्यों है जरूरी?

अगर आप अपने काम के प्रति ईमानदार रहेंगे तो आपका सफल होना तय है आज हमारे पास ऐसे कई उदाहरण है जिससे साबित हो जाता है कि ईमानदारी से बढ़कर कुछ नहीं होता। ईमानदारी जिंदगी रूपी ताले की एक ऐसी चाबी है जिससे मन हमेशा साफ़ रहेगा और आपको झूठ को अपनाने की कभी ज़रूरत नहीं पड़ेगी। बिना ईमानदारी के कोई भी व्यक्ति, परिवार, मित्रों, अध्यापकों आदि के साथ किसी भी स्थिति में रिश्ते को विश्वसनीय नही बना सकता है। ईमानदारी रिश्तों में विश्वास का निर्माण करती है। इसलिए जीवन मे ईमानदारी का होना बहुत जरूरी है।

सूक्ष्मता या ईमानदारी?

अगर ईमानदारी स्वभाव मे नहीं होगी तो आप कभी भी किसी का भी विश्वास नहीं जीत पाएंगे। सूक्ष्मता से हम अपने आप को भी धोखे में रखेंगे। अगर कभी आप सच भी बोलेंगे तो  उस पर यकीन करना बहुत मुश्किल होगा। इसलिए सदेव हमे ईमानदारी बनाए रखनी है।

जीवन के हर क्षेत्र में सफल होने के लिए ईमानदारी और सत्यनिष्ठा बहुत ही आवश्यक हैं और सबसे अच्छी बात ये हैं कि इन दोनो गुणों को कोई भी अपने अन्दर विकसित कर सकता है

“ईमानदारी, चरित्र, सत्यनिष्ठा, विश्वास, प्रेम और वफादारी एक संतुलित सफलता की आधारशिला हैं”

वर्तमान स्थिति

आज पूरा संसार कोरोना महामारी से जुझ रहा है। जहा एक तरफ एक निर्धन व्यक्ती ऑटो चलाकर परिवार का पालन पोषण करता है उसने अपने परिवार की चिंता किए बिना अपने ऑटो को कोरोना मरीजों को लाने ले जाने के लिए समाज सेवी संस्थान को दे दिया तो वही दूसरी ओर गाड़ी मे हवा भरने वाले ने अपने ऑक्सीजन पम्प को मरीज को ऑक्सीजन मिल जाए इसलिए दे दिया। कई लोगों ने अपने चार पहिये वाहन को एम्बुलेंस मे बदलने के लिए दे दिया। ऐसे अनेकों उदाहरण आज हमारे सामने है ऐसे कार्य ईमानदारी और दया भाव दर्शाते है। इसके विपरित कई लोग दवाई,  ऑक्सीजन सिलेंडर, इंजेक्शन, की कालाबाजारी कर रहे हैं। इन व्यक्तियों को यह समझना चाहिए कि कर्म का फल अवश्य मिलेगा। समाज मे ईमानदार और सत्य की राह पर चलने वाले लोग कम है लेकिन इनको समझने वालों की भी आवश्यकता है।

निष्कर्ष

सामाजिक और आर्थिक सन्तुलन को बनाने के लिए लोगों को ईमानदारी के मूल्य को समझना होगा। जीवन के हर मोड़ पर ईमानदारी को अपनाना होगा। क्योंकि भले ही एक व्यक्ती मे कितने ही अच्छे गुण क्यों ना हो परंतु उसका एक दुर्गुण उसके सारे गुणों को ढक देता है इसलिए जीवन मे हमेशा ईमानदारी से अपने कार्यो को करते रहना चाहिए। व्यक्ति के अच्छे कर्म और ईमानदारी से कमाया हुआ धन उसे आत्मसंतुष्टि देता है।

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