• Tue. Dec 1st, 2020

Campus Beat

Independent Student News Organization

क्या राष्ट्रनिर्माण का कार्य दिशाहीन युवाओं के हाथ में ?

Ranjan Kumar Gupta

ByRanjan Kumar Gupta

Oct 21, 2020

Disclaimer: The views and opinions expressed in this article are those of the authors and do not necessarily reflect the views of Campus Beat. Any issues, including, offense and copyright infringment, can be directly taken up with the author.

वरिष्ठ व्यक्ति जंग का ऐलान करते हैं। लेकिन वो तो  नौजवान हैं जिन्हें लड़ना और मरना होता है।

कहा जाता है कि किसी देश की युवा शक्ति ही उस देश का सबसे बड़ा हथियार होता है। ये युवा वर्ग ही है जो राष्ट्र के धरोहर को और कीमती बनाएगा। सचमुच हमारे देश के नौजवान आने वाले कल का भविष्य हैं। भारत जैसे देशों में युवाओं का योगदान और भी बढ़ जाता है। भारत में युवाओं की संख्या काफी ज्यादा मात्रा में है। ये वो वर्ग है जो उस देश की विभिन्न पहलुओं की रूपरेखा बदल और तैयार कर सकती हैं।

राष्ट्र निर्माण किसी राजनीति या नीति निर्धारकों का काम नहीं है बल्कि यह सामाजिक जागृति और युवा शक्ति का सामर्थ्य ही है जो देश के हर हिस्से को सशक्त राष्ट्र के रूप में खड़ा करता है। यह उन परिवर्तनों में से है जो बना युवा के संभव नहीं हो सकता। हमेशा जोश और जुनून से सराबोर रहने वाली युवा पीढ़ी ही आने वाले कल की रूपरेखा तैयार करेंगे।

कुछ नया कर गुजरने की चाह रखना। नित नई-नई चुनौतियों का सामना करने तैयार रहना और संकल्प शक्ति ऐसी कि जो एक बार करने की ठान लें तो लाख मुश्किलें भी उसको बदल न पाएं। लेकिन आज की युवा पीढ़ी को शायद अपनी इन ताकतों का अंदाजा नहीं है कि वह अगर चाहे तो इस देश की सारी रूप-रेखा ही बदल सकती है। अपने हौसले और जज्बे से समाज में फैली सारी बुराइयों को जड़ से उखाड़ फेंक सकती है।

इन बातों से अंजान आज की युवा पीढ़ी अपने ही हाथों अपने जीवन और भविष्य को बर्बाद करने के रास्ते पर चल पड़ी है। बाहरी दिखावटों, पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर अपने आदर्शों और संस्कारों को खोती चली जा रही है। जोश, जुनून, दृढ़ संकल्प, इच्छाशक्ति, हौसले की जगह नशा, वासना, लालच, हिंसा उसके जीवन में शामिल हो गए हैं। दिन-प्रतिदिन आज की युवा पीढ़ी दिशाहीन होकर बुराई और अपराधों के गहरे गर्त में गिरती चली जा रही है।

युवाओं की एक बड़ी आबादी आज दिशाहीन है। यदि समय रहते इन्हें सही राह नहीं दिखाई गई, तो सबसे युवा आबादी वाला देश कहते समय हमें गर्व की अनुभूति नहीं होगी, बल्कि हम शर्मिंदगी महसूस करेंगे। वर्तमान शिक्षा का प्रमुख दोष यह है की यह केवल साहित्यिक और सैद्धान्तिक अधिक है और जो कुछ व्यवसायिक है उनके गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है तभी तो अभियन्ता लोग चपरासी एवं सफाई कर्मचारी के पदों हेतु आवेदन देते हैं।

युवा की अनदेखी एक प्रकार का अपराध है। विगत वर्षों से भारत में युवा असंतोष अत्यंत व्यापक रूप में दिखाई पड़ रहा है। भारत ही नहीं विश्व के कोने-कोने से युवा असंतोष और आंदोलन के समाचार आते रहते हैं। चाहे वह JNU में दीखता युवा असंतोष हो या हैदराबाद के युवाओं का आक्रोश, कहीं न कहीं यह मानव स्वतंत्रता पर प्रतिबन्ध लगाने वाली व्यवस्था के प्रति विद्रोह ही तो है।

विश्व के सभी देशों से ज्यादा युवा भारत में है और भारत का यह शक्ति है, पर अति उदार जनतंत्रीय परम्परा वाले इस देश में प्रायः यदा-कदा कभी आवश्यक तो कभी अनावश्यक कारणों से आन्दोलन रत युवा देखने को मिल जाता है। यह समझ पाना कठिन हो जाता है की इनका असल मुद्दा क्या है. मुद्दा है भी की नहीं? अगर है तो क्या औचित्य है? सार्थकता है? मगर हम ये भी नहीं भूल सकते कि ये युवा पीढ़ी के बदौलत ही निर्भया के दोषियों को सजा मिल पाई है।

सवाल यही है कि क्या आज क‍ी युवा पीढ़ी को गलत दिशा में जाने से रोकने का प्रयास हो रही है? क्या हम कभी यह जानने की कोशिश करते हैं कि आज का युवा देश के भविष्य निर्माण में कितना सहभागी है? जरा सोचिए, क्या हम इस पीढ़ी को देश का भविष्य कहेंगे जो खुद अपने भविष्य को लेकर दिशाहीन है?

यह सच है कि सारा युवा वर्ग इन बुराईयों की चपेट में नहीं है, यह भी सच है कि इसी देश के युवाओं ने अपना एक स्वर्णिम आकाश तैयार किया है। खेल से लेकर राजनीति तक और उद्योग से लेकर कला तक। लेकिन जो बुराई में जकड़े हैं, क्या वह इस देश की जिम्मेदारी नहीं है? जिन क्षेत्रों को युवाओं से दूर रखा जा रहा है उसके गिरेबान में झांकना होगा और देखना होगा कि क्या वजहें हैं। ये युवाओं को ख़ुद ही समझना होगा।

Comments