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प्याज़ की बात सब्ज़ियों के साथ

Aduiti Shreya

ByAduiti Shreya

Nov 8, 2020

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है प्याज़ मेरा नाम
खाने का स्वाद बढ़ाना है मेरा काम
टमाटर सा आकर है मेरा ।
शलजम सा है रूप ,
चुकंदर सा रंग है मेरा ।
क्या भाया तुझे मेरा महंगा स्वरूप ?

यह प्याज़ भी बड़ा मतवाला है टिंडी दीदी हर 2 साल में अपना भाव बढ़ा लेता है , अब क्या करे मिर्ची बहन सब आपके जैसे तो नहीं होते न ,चीलड़ के बदले इस्तेमाल किये जाए । चीलड़ के बदले तो धनिया बाबू भी इस्तेमाल में आते है ,अरे तीखी मिर्ची मुझे क्यों ढकेल रही है कम से कम में बरसातों में तो महंगा रहता हु तुम तो पुरे साल …चीलड़ की जगह लेती रहती हो ।अरे-अरे धनिया मिर्ची वो देखो आलू दादा कितने ठाठ से बैठे है , बूढ़े होगए है फिर भी अकड़ नहीं गईं , ठाठ से क्यों नहीं बैठेंगी टिंडी दीदी आखिर प्याज़ की बर्बरी जो करने वाला है । एक जमाना था जब यु ही सब्ज़ी की दुकान पर पड़ा रहता था , लेते तो सब थे मगर कोई भाव नहीं देता था , और आज का समय देखो भाव पूछ कर लोग पाओ किलो ले जाते है | एक दम सही कहा धनिया बाबू आपने! घोर कलयुग है ।अरे वो देखो आउट डेटेड पुदीना मामा आरहे है | आउट डेटेड किसको बोला कोई मुझे ख़रीदे न ख़रीदे लड़कीयो के पसंदीदा गोलगपे वाले भईया के ठेले की शान हु में ,जो लड़कियों को पसंद है वो आउट डेटेड हो ही नहीं सकता ।बड़े आय खुद को पसंदीदा ;बताने वाले बिना मेरे तीखे तड़के के तुम पानी कम चाय हो समझे मामा ।अरे क्या बाते हो रही है मामा भांजी मै, कुछ नहीं बैंगन नाना सब प्याज़ मौसी की बात कर रहे थे ,वैसे आपका तो सही है आपको प्याज़ मौसी की जरूरत नहीं और पुरे साल एक भाव से बिकते हो । अरे अरे बेटा हमरी बात ही निराली है ।अरे वो देखो मोमो की जान और कपड़ो की दुकान पता गोभी मामी आरही है । हाँ भाई हु मै कपड़ो की दुकान , अब क्या करे मै हु ही इतनी टेस्टी | मामी आप इतनी टेस्टी है की चीन आपकी जुड़वा बहन प्लास्टिक से बना रहा है । चुप कर मिर्ची वरना कीड़े डाल दूंगी । मै शिमला मिर्च नहीं जो कीड़ो से डरु मै मिर्ची हु लोग मुझसे डरते है ।
क्या बाते हो रही है ! कुछ नहीं प्याज़ मौसी वैसे आज बड़ा गॉगल शोगल लगा कर घूम रही हो । क्या करू मिर्ची बेटा मै हु ही इतनी कीमती लोग मुझे तिजोरी मै रखते है , मै हु ही इतनी हसीन क्या करू बातो मै करू । अरे मिर्ची तेरी मौसी मेरी जानेमन है ,मेरी गर्लफ्रेंड मेरी जाने जिगर है | हाँ हाँ मशरूम समझ गई में | मगर गर्लफ्रेंड है तो आपकी ,पर जेब ढीली सबकी करती है ।

सच बताए तो आज प्याज़ हम सब की गर्लफ्रेंड जैसी होगी है पहले ज़्यादा मिलती थी तो बीवी लगती थी | अब कम मिलती है गर्लफ्रेंड सी लगती है । पहले तो बस काटते वक़्त रुलाती थी ,अब तो खरीदते वक़्त भी रुलाती है । पहले छोले कुलचे का स्वाद बढ़ती थी , अब तो सलाद मै भी नसीब नहीं होती ।
ऐ प्याज़ ,
तू क्यों तड़पती है ,
खाने के शौखिन को क्यों रुलाती है ।
ऐ प्याज़ मत कर ऐसी बेखुदी ,
मै तेरा दीवाना हु ,
तू भी कर ले दीवानगी ।
भाव मै थोड़ी नरमी ला ,
यु न तड़पा अपने परवाने को ।

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