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मरीजों की पहुंच से बाहर हो रही दवा की कीमतें।

Sabana Praween

BySabana Praween

Sep 29, 2020

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doctor holding red stethoscope
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मरीजों की पहुंच से बाहर हो रही दवा की कीमतें।करोना काल में दवा कंपनियां भी खूब मनमानी कर रही है। दवा की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि कर दी गई है। जरूरी दवाईयों से लेकर सामान्य किस्म की दवाईयो की कीमत अचानक बढ़ने से मरीज बेहाल है यह वृद्धि थर्मामीटर से लेकर बीटाडीन जैसी दवाइयों में भी कर दी गई है। इसके अलावा दवा कंपनियों ने बीकोसूल, जिंकोविट , बीटाडीन जैसे दवाइयों की कीमतों में तो 10 से 25 फिसदी तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। रिटेल में कई दवाओं की कीमतें आसमान पर पहुंच गई है। विभिन्न ब्रांड के पारासिटामोल, विभिन्न प्रकार की विटामिन की गोली ,बी कांपलेक्स, कफ सिरप व दर्द निवारक दवाइयां 10 से 25 फ़ीसदी महंगी हो गई है। इससे उपभोक्ताओं की जेब से जबरदस्त लूट देखने को मिल रहा है। कोरोना से पूर्व 48 रुपए में बिकने वाली एंटी एलजीक की कीमत ₹65 कर दी गई है। ₹10 में बिकने वाली फलाजिल की कीमत 28.8 हो गई है।कोरोना से बचाव के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले ग्लव्स की कीमतें मानो आसमान छू रही है,इसी ग्लव्स में बीते 4 महीने में 3 गुना वृद्धि हुई है। पहले 100 ग्लव्स का पैकेट खुदरा में 300 रूपए में बिकता था अब 900 रूपए में बिक रहा है , यानी 3 रुपए में बिकने वाला ग्लव्स अब 900 रुपए में बिक रहा है। कीमतें बढ़ने से बिक्री भी घट रही है,ग्लव्स महंगा होने के कारण लोग अब इसके इस्तेमाल से बच रहे हैं बहुत जरूरी होने पर ही खरीदारी करते हैं। वही मास्क की बढती कीमतों के कारण खरीदारी भी घट रही है। लोग एक ही मास्क को बार-बार धोकर इस्तेमाल में लाते हैं।हालांकि कोरोना काल में दवाओं की शॉर्टेज मार्च से मई माह तक हुई थी। दवा विक्रेता के अनुसार लोकडॉउन के शुरुआती काल में दवाओं की थोड़ी किल्लत हुई थी। दवा की गाड़ियां ही नहीं आ पा रही थी। जिस दवा को खोजने के लिए ग्राहक आते थे वह दवा उनको मिल नहीं पाती थी। मई के बाद स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई। सभी दवाओं की आपूर्ति समय पर होने लगी थी। जुलाई से अगस्त के बीच सभी थोक विक्रेताओं के पास पर्याप्त मात्रा में दवाओं स्टॉक था , दवाई की आपूर्ति होने पर भी दवाई की कीमतों में तेजी से वृद्धि होनी शुरू हो गई । जिससे उपभोक्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ।

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