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मानसिक स्वास्थ्य (Mental health) : अचर्चित विषय

Ritu Rani

ByRitu Rani

Oct 30, 2020

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‘मानसिक स्वास्थ्य’ या ‘मेंटल हेल्थ’ एक ऐसा विषय है जिसके बारे में बात करने से लोग डरते हैं । भारत एक ऐसा देश है , जहां मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों में काफी कम जागरूकता पाया गया है । विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब चालीस मिलियन भारतीय किसी न किसी तरह से मानसिक विकार चाहे वो तनाव हो या अवसाद (Depression) से ग्रस्त हैं । पूरे विश्व में मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाने का बस एक ही प्रमुख उद्देश्य है कि लोगों में इस बात का संदेह मिटाया जा सके कि हर मानसिक बीमारी पागलपन का लक्षण नहीं होता है और किसी भी शारीरिक बीमारी की तरह ही इसे भी दवाओं और बातचीत के जरिए ठीक किया जा सकता है ।

क्या हैं मानसिक बीमारी ?

विश्व स्वास्थ्य संगठन , मानसिक स्वास्थ्य को परिभाषित करते हुए कहता है कि यह “सलामती की एक स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का एहसास रहता है , वह जीवन के सामान्य तनावों का सामना कर सकता है , लाभकारी और उपयोगी रूप से काम कर सकता है और अपने समाज के प्रति योगदान करने में सक्षम होता है । यह पहले कहा जा चुका है कि मानसिक स्वास्थ्य की कोई एक “आधिकारिक” परिभाषा नहीं है । दूसरे शब्दों में कहा जाए तो , मानसिक बीमारी एक ऐसी बीमारी होती है जो किसी भी व्यक्ति की सोच , भावना , मूड , व्यवहार आदि में बदलाव ला देता है । अवसाद , तनाव, बिपोलर डिसऑर्डर भी इसी मानसिक बीमारी का एक हिस्सा है । ऐसी स्थिति अगर लगातार कुछ समय तक बनी रहती है तो वह किसी इंसान की दिनचर्या को नकारात्मक रूप से बदलने लगती है ।

मानसिक स्वास्थ्य का इतिहास

19वीं शताब्दी के मध्य में , ‘विलियम स्वीटजर’ प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने “मानसिक स्वास्थ्य” को पहली बार स्पष्ट रूप से परिभाषित किया , जिसे सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के कार्यों के समकालीन दृष्टिकोण के अग्रदूत के रूप में देखा जा सकता है। ‘इसाक रे’ जो अमेरिकी मनोरोग एसोसिएशन के तेरह संस्थापकों में से एक थे , उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को एक कला के रूप में परिभाषित किया है जिसका कार्य है ऐसी घटनाओं और प्रभावों के खिलाफ मस्तिष्क को संरक्षित करना जो इसकी ऊर्जा , गुणवत्ता या विकास को बाधित या नष्ट कर सकते हैं ।

“मानसिक स्वास्थ्य” के क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण शख्सियत थी ‘डोरोथिया डिक्स’ (1808-1887) , एक स्कूल शिक्षिका , जिन्होंने अपने पूरे जीवन उन लोगों की सहायता के लिए प्रचार किया जो मानसिक बीमारी से पीड़ित थे और उन दु:खद परिस्थितियों को सामने रखा जिसमे इन लोगों को रखा जाता था। इसे “मानसिक स्वच्छता आन्दोलन” के रूप में जाना गया। इस आंदोलन से पहले , यह आम था कि मानसिक बीमारी से प्रभावित लोगों को 19 वीं शताब्दी में काफी उपेक्षित किया जाता था , अक्सर खेदजनक स्थिति में अकेला छोड़ दिया जाता था और उनके पास बमुश्किल पर्याप्त कपड़े होते थे । डिक्स के प्रयास इतने कारगर थे कि मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं में रोगियों की संख्या में वृद्धि होने लगी , जिसके परिणामस्वरूप इन रोगियों की देखभाल अच्छी तरह नहीं हो पा रही थी , क्योंकि इन संस्थानों में कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर कमी हो रही थी ।

20वीं सदी की शुरुआत में , ‘क्लिफर्ड बीयर्स‘ ने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य समिति की स्थापना की और संयुक्त राज्य में ‘प्रथम आउट पेशेंट मानसिक स्वास्थ्य’ क्लिनिक खोला ।

हालांकि वास्तविक मनोरोग अस्पताल में इलाज की ऐतिहासिक शुरुआत अभी भी विवाद का विषय है , इस बात के सबूत जमा हो रहे हैं कि पश्चिमी दुनिया में पहला प्रामाणिक मनोरोग अस्पताल स्पेन में 15 वीं सदी के दौरान स्थापित किया गया । यह प्रपत्र उन अस्पतालों में से प्रारंभिक अस्पताल का वर्णन करता है , जिसे एक ‘मर्सीडेरियन तपस्वी फादर जुआन गिलाबर्ट जोफ्रे’ और वालेंसिया के संबंधित नागरिकों के एक समूह द्वारा 1410 में खोला गया था। अस्पताल आज भी संचालन में है।

मानसिक स्वास्थ्य के कारण

व्यक्ति के मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के अनेकों कारण हो सकते हैं ।

1. अनुवांशिक कारण – शोध से यह पता चलता है कि अपने वांशिक पीढ़ी में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित कोई समस्या होती है तो कुछ जीन व्यक्ति में मानसिक समस्याओं के खतरे को बढ़ा देते हैं ।

2. मनोवैज्ञानिक कारण – जीवन के नकारात्मक अनुभव भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं । प्रेम में असफल होना , परीक्षा में बार-बार असफल होना , अत्यधिक आर्थिक परेशानियां , मानसिक दबाव , लंबे समय तक बने रहने वाला उच्च स्तर का तनाव , लैंगिक एवं शारीरिक शोषण का शिकार होना , कम उम्र में माता – पिता की मृत्यु हो जाना , असाध्य रोग से ग्रसित होना , ऐसी समस्याओं से घिर जाना जिससे छुटकारा पाने का कोई भी उपाय ना हो और ना ही ऐसा कोई व्यक्ति हो जिसकी मदद से उसे हल किया जा सके । ऐसी स्थितियां व्यक्ति में मानसिक समस्याएं उत्पन्न होने के लिए उत्तरदायी होती हैं ।

3. पारिवारिक कलह – मानसिक स्वास्थ्य से जुडे़ समस्या पारिवारिक कलह की वजह से भी होती है । पति – पत्नी के बीच खराब संबंध , भाई – बहनों के बीच ईर्ष्यापूर्ण संबंध , माता- पिता का बच्चों के साथ भेदभाव पूर्ण व्यवहार भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं ।

4. गर्भावस्था के कारण – गर्भवती महिला यदि नशे का सेवन करती है तो उसका प्रभाव भी उसके बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है । गर्भावस्था में महिला लगातार उच्च स्तर की सांबेगिक तनाव में रहती है तो भी यह देखा गया है कि उसके बच्चे में मानसिक समस्याएं अधिक होने की संभावना बनी रहती है ।

5. मस्तिष्क में रासायनिक संतुलन – अत्यधिक दवाओं व नशे के प्रयोग , लंबे समय तक उच्च तनाव के बने रहने पर , गंभीर बीमारी व गंभीर संक्रमण के कारण मस्तिष्क में जैविक एवं रासायनिक परिवर्तन होने से व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाता है । हारमोंस के असंतुलन के कारण भी अनेक मानसिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं ।

वर्तमान परिस्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार , भारत में मानसिक रोगों से पीड़ित लोगों की सबसे अधिक संख्या मौजूद है । तथ्यों के आधार पर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि भारत एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य महामारी की ओर बढ़ रहा है । आँकड़े बताते हैं कि भारत में 15-29 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों की मृत्यु का सबसे बड़ा कारण आत्महत्या है । वर्ष 2011 की जनगणना आँकड़ों से पता चलता है कि मानसिक रोगों से ग्रसित तकरीबन 78.62 फीसदी लोग बेरोज़गार हैं । भारत में मानसिक रूप से बीमार लोगों के पास या तो देखभाल की आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं और यदि सुविधाएँ हैं भी तो उनकी गुणवत्ता अच्छी नहीं है ।

मानसिक स्वास्थ्य के उपचार

  1. अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत – अस्पताल में भर्ती होने पर मानसिक रोग के उपचार में आमतौर पर स्थिरीकरण , निगरानी , दवा , तरल पदार्थ और पोषण की देखभाल और अन्य जरूरी आपातकालीन देखभाल होती हैं ।

2. दवाएं – मानसिक रोग के लक्षणों के इलाज के लिए दवाओं का उपयोग किया जा सकता है । दवाओं का प्रयोग अक्सर मनोचिकित्सा के साथ संयोजन में किया जाता है ।

3. मनोचिकित्सा – मानसिक रोग के लिए कई विभिन्न प्रकार की मनोचिकित्सा उपलब्ध हैं, जैसे – व्यक्तिगत चिकित्सा , ग्रुप थेरेपी , पारिवारिक चिकित्सा , संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (Cognitive Behavioral Therapy) , डायलेक्टिकल वर्चुअल थेरेपी (Dialectical behavior therapy) , पारस्परिक उपचार हैं ।

4. वैकल्पिक उपचार – मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग , ध्यान , पौष्टिक आहार और व्यायाम जैसे कुछ वैकल्पिक उपचार भी है ।

मानसिक बीमारी हमारे मानसिक स्वास्थ्य से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है । मेंटल हेल्थ की बात करें तो इसमें इमोशनल , साइक्लोजिकल और सोशल वेल बीइंग जैसे बिंदु शामिल हैं । हमारा मानसिक स्वास्थ्य इस बात पर प्रभाव डालता है कि हम कैसे सोचते हैं ? हम क्या महसूस करते है और कैसे हम भी याद करते हैं ? इतना ही नहीं , यह हमें स्ट्रेस मैनेजमेंट के साथ-साथ हमारी पसंद और नापसंद पर भी सक्रिय रहता है । मेंटल हेल्थ हमारी जिंदगी में बचपन से शुरू होकर युवावस्था और बुढ़ापे तक के सफर को प्रभावित करता है । मेंटल हेल्थ हमारे पूरे स्वास्थ्य पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों परिणाम दिखाती है । बशर्ते यह बात इस पर निर्भर करती है कि हमारी मेंटल हेल्थ कितना ठीक तरह से काम करती है और कितनी ठीक तरह से नहीं । मेंटल हेल्थ से जुड़ी कुछ समस्याएं जैसे डिप्रेशन के कारण हमें कई प्रकार की फिजिकल हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती है । इसके अलावा अगर यह लंबे समय तक बना रहे तोस्ट्रोक , टाइप टू डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है । इसलिए जितना हो सके मानसिक स्वास्थ्य के विषय में खुलकर बात करें और चिकित्सक से परामर्श लेना सही विचार है क्योंकि यह व्यक्ति के मन में डर , खुद के प्रति घृणात्मकता पैदा कर देती है ।

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