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पुष्पम प्रिया चौधरी: बिहार की गरिमा या राजनीतिक एजेंडा?

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ByCampus Beat

Sep 13, 2020

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Pushpam-Priya-Chaudhary
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बिहार ने राजनेताओं की क्रमागत उन्नति को देखा है। 74 के आंदोलन से निकले सभी नेता आज शीर्ष स्थानों पर हैं। सवाल ये है कि क्या बुजुर्गों के प्रभुत्व वाले ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में युवा नेताओ की पहचान विलुप्त हो रही है? क्या बेरोजगारी, तकनीकी पिछड़ापन, इंफ्रास्ट्रक्चर से जुडी समस्याएं, शिक्षा की घटती और अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति के लिए एक पुरानी सोच और प्राचीन सरकारी ढांचा जिम्मेदार हैं?

मार्च में बिहार 2020 चुनावी समर में एक हलचल सी आ गयी जब दरभंगा की रहने वाली एक युवा लड़की, पुष्पम प्रिया चौधरी, ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए खुद को मुख्यमंत्री पद का उमीदवार घोषित कर दिया। पुष्पम प्रिया चौधरी किसी आम राजनीतिज्ञ से विचारधारा एवं वेशभूषा दोनों में अलग हैं।

हाथ में एक स्मार्ट वॉच, काले रंग की पोषक, काले रंग का मास्क, और आँखों में परिवर्तन का तेज़ लिए पुष्पम अपने पार्टी ‘Plurals’ के संगठनात्मक कार्यों में अक्सर नज़र आ जाएँगी। ‘Bihar Deserves Better, and Better is Possible’ का जूनून लिए पुष्पम बिहार के नवनिर्माण के लिए अग्रसित हैं।

Pushpam Priya Chaudhary, Plurals Party, Bihar Election 2020
Image Courtsey: Pushpam Priya Chaudhary / Twitter

बिहार विधानसभा: वर्तमान परिस्थिति

ADR के रिपोर्ट के अनुसार, अगर मौजूदा विधानसभा को देखे तो ये जानकारी मिलती है:

  • 243 में से 142 (58%) विधायकों के ऊपर आपराधिक मामले चल रहे हैं
  • 40% विधायकों ने अपने ऊपर गंभीर मामले घोषित किये हैं – महिलाओं के ऊपर अत्याचार, सांप्रदायिक दंगे, हत्या इत्यादि शामिल हैं
  • 38% विधायकों की शैक्षिक योग्यता 12वी पास है

जिस राज्य में 50% से ज्यादा विधायकों पर आपराधिक मामले चल रहे हो और 30% से ज्यादा विधायक सिर्फ 12वी पास हों, उस राज्य को अगर ‘बीमारू’ राज्य कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

पर क्या सिर्फ इस कारण से लंदन में प्रशिक्षित एक लड़की को पुरे बिहार की बागडोर देना उचित है?

Image Courtsey: Pushpam Priya Chaudhary / Twitter

Plurals एक नई सोच क्यों है?

Plurals की अध्यक्ष पुष्पम प्रिया चौधरी का जन्म और पालन पोषण बिहार के दरभंगा में हुआ है। वह अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए यूनाइटेड किंगडम और ससेक्स विश्वविद्यालय के Institute of Development Studies से विकास अध्ययन में स्नातकोत्तर पूरा किया। उनके शोध का विषय शासन, लोकतंत्र और विकास अर्थशास्त्र था।

सुश्री चौधरी ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस में मास्टर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन किया। LSE में, उन्होंने राजनीति विज्ञान, राजनीतिक दर्शन, सार्वजनिक प्रशासन, अर्थशास्त्र, सार्वजनिक नीति, सामाजिक नीति और राजनीतिक संचार के लिए दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया।

एक शिक्षित नेतृत्व में Plurals का मिशन बिहार की चरमराई अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना है; एक नया बिहार बनाने के लिए, जो 2025 तक देश में सबसे अच्छी तरह से शासित और विकसित राज्य बने।

गौर करने की ज़रूरत है शब्द ‘पुर्नर्जीवन’ पर। बाकी राजनेताओ की तरह जो बिहार को ब्राज़ील बनाने का शौक रखते हैं, पुष्पम बिहार की खोयी मर्यादा को पुर्नर्जीवित कर इस राज्य को वापस जगद्गुरु के पद पर आसीन करना चाहती हैं।

एक अच्छी पहल

अक्सर लोग ये पूछा करते हैं की बिहार से इतने प्रवासी मज़दूर दूसरे राज्यों में क्यों जाते हैं? सिर्फ एक ही जवाब है, रजिनीतिज्ञों की मिलीभगत के कारण। कभी विश्व को दिशा दिखाने वाला ये राज्य आज सिर्फ एक अपशब्द बन कर रह गया है। बड़े शहरों में अक्सर आपको लोग कहते मिल जाएंगे ‘बिहारी जैसी हरकतें मत करो’.

वक़्त है की बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की, एक ऐसे व्यक्तिव्य की जो बिहार और बिहारी शब्द के गौरव को पुनर्जीवित कर सके। शिक्षित, नौजवान, और प्रभावशाली नेता ही बिहार का भविष्य हैं – बुजुर्गों नेताओं को आशीर्वाद और मार्गदर्शन के साथ इनका स्वागत करना चाहिए।

हमारा सामूहिक दायित्व है कि जाती धर्म से परे होकर एक विकसित समाज के लिए मतदान करे।

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