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सादगी परम विशेषज्ञता है

Sanchit Shrivastava

BySanchit Shrivastava

Jul 2, 2021

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green leafed plant on clear glass vase filled with water

कहा जाता है कि हम वर्तमान में एक भौतिकवादी समाज में रहते हैं। व्यक्तियों को उनके धन के आधार पर आंका जाता है, एक अमीर को बौद्धिक माना जाता है और एक व्यक्ति जो अधिक शिक्षित होता है, लेकिन धन के मामले में समान नहीं होता है, उसे आमतौर पर कम करके आंका जाता है। ऐसा नहीं है कि हम हमेशा से ऐसे ही थे, यह हमारे व्यक्तित्व में पश्चिमीकरण के आगमन के साथ जुड़ गया है। हालाँकि आज तेजी से भागती दुनिया में भी, सादगी को एक विशेषज्ञता माना जाता है और जिन लोगों में यह आदत होती है, उनकी आमतौर पर सराहना की जाती है।

सादगी प्रतिभा की कुंजी हैब्रूस ली

सादगी रखने वाले लोगों को सकारात्मक तरीके से याद किया जाता है।

यदि हम अतीत में देखें तो सादगी एक आदत थी जिसका पालन समाज के कुछ सम्मानित व्यक्ति करते थे। यदि हम सादगी को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो आज की राजनीति में हम भ्रष्टाचार और गलत कामों के बारे में बहुत सारी कहानियाँ सुनते और देखते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि राजनेता हमेशा से ऐसे ही रहे हैं। इससे पहले हमारे भारत में कई राजनेता हुए हैं जिन्हें उनकी सादगी के लिए याद किया जाता है। ऐसा ही एक नाम मेरे दिमाग में आता है लाल बहादुर शास्त्री का। कुशल शासन के अलावा वे सादगी और अनुशासन के लिए प्रसिद्ध थे। उनके बेटे ने एक दफ़ा बताया कि शास्त्री जी अपने ऑफिस की कार का इस्तेमाल निजी कामों के लिए नहीं करते थे। उन्होंने अपने परिवार के लिए कर्ज़ लेकर दूसरी कार खरीदी , जिसका कर्ज़ उनकी विधवा पत्नी ने बाद में चुकाया। इसी तरह पूर्व भारतीय राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को उनकी सादगी के लिए याद किया जाता है। बताया जाता है कि उनके आखिरी सामान में कपड़े, किताबें, एक घड़ी और जूते थे। उनके पास कोई कार या संपत्ति भी नहीं थी। यह बताने के लिए काफी है कि हमारे समाज के सफल लोग इतनी सफलता पाने के बाद भी अपने व्यक्तित्व में सादगी रखते थे और उन्हें आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।

सादगी बनाम जटिलता

पिछले कुछ वर्षों में जटिल या शक्तिशाली व्यक्ति होने की एक नई अवधारणा विकसित की गई है। आमतौर पर लोग यह मान लेते हैं कि जिन लोगों के व्यक्तित्व में कोमलता और शिष्टता होती है वे कमजोर होते हैं और जिनके व्यक्तित्व में अहंकार होता है वे मजबूत होते हैं। सोचने के लिए भी, यह पूरी तरह से निराधार सिद्धांत है, इसका सबसे प्रमुख उदहारण रामायण से ही लिया जा सकता हैं, जहां एक तरफ रावण था, जिसका अहंकार उसकी सबसे बड़ी विशेषता थी तो दूसरी तरफ मर्यादा पुरुषोत्तम राम थे जिनको सादगी और कोमल व्यक्तित्व के लिए जाना जाता है। ये बताने की जरूरत नही की सादगी बनाम अहंकार में किसे विजय प्राप्त हुई। । आज की दुनिया में जहां लोग किसी व्यक्ति को उसके स्वभाव से याद करते हैं, वहां रवैया एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। न केवल दैनिक बातचीत में बल्कि लोगों के करियर में भी। एक शांत और सरल व्यक्ति आमतौर पर कोई भी कदम उठाने से पहले अधिक सोचता है, अगर मुझे सादगी और जटिलता के बीच चयन करना होता तो बिना किसी अन्य विचार के। मैं स्पष्ट कारणों से सादगी को ही चुनता, सादगी जितना सुनने और सोचने में आसान दिखती है असल माइनो में इसे व्यक्तिव में अपनाना उतना ही मुश्किल है।

यह सच है कि आज भी कई लोगों के व्यक्तित्व में आमतौर पर सादगी होती है और उनमें से कईयों की देश भर में सराहना भी हो रही है। आज के परिप्रेक्ष्य में भी पंकज त्रिपाठी और मनोज बाजपेयी जैसे अभिनेताओं को उनकी मौलिकता और सादगी के कारण ही उचित सराहना मिल रही है। तो यह स्पष्ट है कि जिन लोगों के स्वभाव में सादगी होती है, उन्हें समाज में सम्मान के साथ स्वीकार्यता मिल रही है।
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