कोक नगरी के चक्कर में क्या हम इंसाफ भूल बैठे है?

कोक नगरी के चक्कर में क्या हम इंसाफ भूल बैठे है?


सत्य सत्य सब कहे ,
सत्य न बोले कोई |
झूठ को ऐसे पिरोए ,
मनो सोना चंडी होए |

बरहाल यही कहनी कह रही है सुशांत सिंह राजपूत की गाथा। लॉकडाउन डिप्रेशन से मर्डर तक, रिया की ख़ामोशी से कंगना के दहाड़ तक, भट जी के लव कनेक्शन से आलिया जी के नोपोटिस्म तक, मुंबई पुलिस की चोरी से बिहार पुलिस की सीनाजोरी तक, नेताओ के बयानों से मिडिया की टी.आर.पी तक, सब अपना अपना स्वार्थ सजोने में लगे हैं। कोई अपना सच छुपा रहा है, तो कोई मुखोटे के पीछे का सच दिखा रहा है। मगर हर एक शब्द स्वार्थ के घड़े को भर रहा है, इस स्वार्थलोक ने बिलखते परिवार को न देखा जिसने अपने बगीचे का गुलशन खोया है, जिसने अपने जिगर के टुकड़े को गंगा में बहाया है| रोया पूरा देश था उसदिन, उस सितारे की मुस्कुराहट याद करके, लेकिन देश के आँसुओ में भी स्वार्थ था, अपने मनोरंजन को खोने का |

स्वार्थ ही जीवन,
स्वार्थ है धन
इस स्वार्थ के चक्कर में ,
हो गए सितारे नम
कहने को था पावन रिश्ता,
लग गई इसमें नशे की आग
आग में जलकर भुन गए ,
न जाने कितने गुलशन हज़ार


सुशांत की किस्मत इतनी अच्छी न निकली की वह अपने गुनेहगारो को जेल जाते देख पाते। वैसे ऐसी किस्मत तो फ़िलहाल हमारी भी नहीं हुई है, क्योकि अब मामला हो गया है ड्रग्स का। भोली भाली रिया ने एक थप्पड़ में सब उगल दिया|अभिनेत्री की शानोशौकत से जेल की दरिदत्रा का रास्ता लम्बा नहीं था। इस ड्रग मंडली का असली रूप धीरे-धीरे सामने आ रहा है, जहा पूरा बॉलीवुड, उड़ता बॉलीवुड प्रतीत हो रहा है, फिल्मी सितारे हो या उनके मैनेजर सब इस उड़ान का हिस्सा बनते हुए आम जनता को दिखाई पड़ रहे है। जो फिल्मो में औरो को संस्कार बाँटते और सच्चाई की राह दिखाते थे वो खुद इतने डूबे होंगे इसकी परिकल्पना करना असंभव सा था|

सुशांत भी देख कर हसते होंगे की मैंने दुनिया को क्या अलविदा कह दिया, लोग खुद को अलविदा करने में लगे है|इस ड्रग कनेक्शन की सच्चाई सुन हम सब इतने हैरत मे हैं की सुशांत के न्याय को भूल बैठे है, इकॉनमी को डुबाए बैठे है, जवानो की शहादत को भुला बैठे है, चीन को औकात दिखाना भी भूल बैठे है| इस भूल भुलइया मे इतना न खो जाना, जिसकी आस में निकले थे उसकी आस को न भूल जाना, न्याय दिलाने की चाह कभी न दिल से जाने देना, देश के इस गुलशन को आसमान में गुलशन बनने का मौका देना न भूलना |


चाहे कितनी तारीख़ पे तारीख़ दी जाए, हमारी न्याय पालिका इतनी सजग है की इंसाफ तो मिलेगा।

Comments

Aduiti Shreya

I am a dream aspirant,  I aspire my dream as I don't want my dreams to be hallucination I want it to be a reality and for that, I am ready to give my best