हम साथ दें तो सब सम्भव है।

विविधता में एकता, यह हम सबने सुना है और इसके बारे में पढ़ा भी है। किसी भी बड़े कदम को अन्जाम देने के लिए सबसे बड़ी चीज़ मानी जाती है एकता का होना। जब देश में हर इंसान का एक ही मक्सद हो तो बदलाव आना निश्चि है।
और यह सिर्फ कहने की बात नहीँ है, हमने ऐसा करके भी दिखाया है। एक बार आज़ादी के समय, और दूसरी बार अब। सोशल मीडिया की दुनिया में।

अगर आप ना समझ पाए हों कि मैं किस चीज़ की बात कर रही हूँ तो यह आपके लिए:

एक उदाहरण

“रसोड़े में कौन था?”

आपको कुछ जानकारी हो या ना हो, इस सवाल का जवाब ज़रूर होगा। और हो भी क्यों ना सोशल मीडिया पर यह इतना फैला हुआ जो था। बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक, सबने इसे शेयर किया और खूब पसंद भी किया।

जब एक साधारण से सिरिअल का मामुली सा संवाद इतना प्रचलित हो सकता है। बस इस वजह से क्योंकि उस वक़्त सबलोग मिलकर इसके प्रचलन में लगे थे, तो ज़रा सोचके देखिये हम अगर मिल जाएँ तो क्या नहीँ कर सकते? किसको इंसाफ़ नहीँ दिला सकते? किसके लिए नहीँ लड़ सकते? ऐसा क्या है जो संभव नहीँ हो सकता?

“बिनोद” नाम तो सुना ही होगा?
यह एक और उदाहरण है। अब शायद आपको अंदाज़ा लग रहा होगा कि एकता में कितनी शक्ति है।

एक जायज़ सवाल

अब आपके दिमाग में एक सवाल आ रहा होगा, जोकि जायज़ भी है। और वह ये होगा कि अगर एकता में इतनी शक्ति है ही तो इंसाफ क्यों नहीँ मिलता? अपराधियों को सज़ा मिलने में इतना विलम्ब क्यों होता है?
इसका सीधा सा जवाब यह है कि इन चीज़ों को उतनी प्रार्थमिकता नहीँ दी जाती। हाँ बहुत से लोग विरोध करते हैं, धरने पर बैठते हैं, अन्न शन्न पर जाते हैं, पर इतने लोग काफी नहीँ होते। और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अधिकतर लोग मनोरंजन की चीज़े तो हर इंसान को भेजते हैं, पर किसीके इंसाफ़ की लड़ाई में अपना हाथ बढ़ाने का दम नहीँ रखते।

आपसे एक विनती

कई चीज़ें जो हमारे फ़ायदे की नहीँ लगती या मनोरंजन के काम नहीँ आती उन्हें हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं। मेरी एक विनती है आप सबसे, किसीकि मदद करने की क्षमता अगर आपमें है तो उसे नज़रअंदाज़ ना करें। किसीकि मदद करने से आपका समय बर्बाद नहीँ होगा।

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Arpana Kumari

I am a person with varied interest. I am always drawn towards art and willing to learn new things. My goal is to create an impact in our society and make the change required for growth.