• Fri. Dec 3rd, 2021

Campus Beat

Independent Student News Organization

अत्यधिक लोकतंत्र विकास के लिए हानिकारक है

Niharika

ByNiharika

Jun 29, 2021

Disclaimer: The views and opinions expressed in this article are those of the authors and do not necessarily reflect the views of Campus Beat. Any issues, including, offense and copyright infringment, can be directly taken up with the author.

सितंबर 2020 में संसद भवन में केंद्र सरकार द्वारा भारतीय किसानों की आय वृद्धि के हित में तीन कानून पारित किये गए थे, जिसके समर्थन और विरोध की लड़ाई अभी तक ज़ारी है | ये कानून हैं : कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवंर्धन एवं सरलीकरण) 2020, कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन व कृषि सेवा करार 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) 2020 | ये कानून, किसानों को बिना टैक्स दिए दूसरे राज्यों में फसल बेचने, अनुबंध की खेती व उसकी मार्केटिंग करने और स्टोरेज संबंधी स्वतंत्रता प्रदान करते हैं। इन लाभों के पश्चात भी कुछ प्रदेशों जैसे पंजाब और हरियाणा के किसान इन कानूनों को लागू करने के विरुद्ध कई महीनों तक प्रदर्शन करते रहे, जिसके कारण उच्च न्यायालय ने उन्हें आम जनता के लिए जारी करने पर रोक लगा दी है | किसान आंदोलन के चलते नीति आयोग के सी .ई .ओ . अमिताभ कांत जी ने एक पत्रकार सम्मेलन के दौरान अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा था कि “भारत में नई नीतियों एवं सुधारों को लागू करना अत्यंत कठिन है क्योंकि भारत एक अत्यधिक लोकतंत्र वाला देश है |” हालांकि इस बयान के बाद वे काफ़ी विवादों में घिर गए थे और स्वयं को सुरक्षित करने के लिए बाद में इस कथन को संशोधित करते हुए चीन से भारत की तुलना की और उतना विकसित न हो पाने का कारण अत्यधिक लोकतंत्र को बताया | उनका यह विचार देश के अनेक लोगों के मस्तिष्क में घर कर गया, कि “क्या वास्तव में हमारे देश में विकास की गति धीमी होने का मुख्य कारण अत्यधिक लोकतंत्र है या सरकार की नीतियां हैं?”

क्या है लोकतंत्र?

लोकतंत्र एक प्रकार की शासन पद्धति है, जिसका अर्थ है ‘जनता का शासन’| यह वर्तमान समय की सबसे श्रेष्ठ और सफल शासन प्रक्रिया है एवं अधिकतम देशों ने इसे अपनाया हुआ है | इसमें आम जनता के इच्छाएँ सर्वोपरि होती हैं तथा उनके द्वारा चुने गए प्रत्याशी ही सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं | सरकार अपनी नीतियों का गठन सभी देशवासियों को होने वाले लाभ-हानि को ध्यान में रखकर करने के लिए बाध्य होती है | लोकतंत्र लोगों को मतदान का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता का अधिकार, निष्पक्ष कानून व्यवस्था, और शिक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता जैसे अनेक अधिकार प्रदान करता है | लोकतंत्र एक आदान -प्रदान प्रणाली है, जिसमें केवल सरकार के ही नहीं बल्कि आम जनता के कर्त्तव्य भी मायने रखते हैं | जहाँ एक तरफ़ जनता को सरकारी योजनाओं के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की स्वतंत्रता है वहीं दूसरी तरफ़ संविधान में लिखित नियमों का अनुसरण करना आवश्यक है, तथा जो उन नियमों का उल्लंघन करता है, वह दंड के योग्य माना जाता है | 

उपर्युक्त लिखित सकारात्मकताओं के अतिरिक्त लोकतंत्र पूर्णतः जनता के हित में नहीं है | इसे अस्थिरता, अयोग्यता, सांख्यिकी, उग्र दलबंदी, एवं खर्चीला शासन भी कहा जाता है | यही कारण है, कि वर्तमान समय में भी कुछ चीन, उत्तर कोरिया जैसे देश हैं जो अभी भी राजतंत्र शासन द्वारा शासित हैं | 

अत्यधिक लोकतंत्र : गुण या दोष?

भारत संपूर्ण विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है फिर भी स्वतंत्रता के 74 वर्षों बाद यह एक विकासशील देश के रूप में विख्यात है | भारत के एक विकसित देश न बन पाने का दोष कुछ लोग यहां की शासन प्रणाली को समझते हैं, तथा इसे अत्यधिक लोकतंत्र का नाम देकर तानाशाही शासन का समर्थन करते हैं |  ऐसे लोगों को समझना चाहिए, कि भारत एक विभिन्नताओं का देश है, एवं यहां हर देशवासी, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, भेद, नस्ल, या  प्रदेश का हो, की सुख समृद्धि महत्वपूर्ण होती है | 

अमिताभ जी की यह बात बिल्कुल सही है, कि भारत की विविधता के कारण यहां किसी भी नीति का प्रयोजन करना अत्यंत कठिन है, लेकिन एक सफल योजना का गठन करना नामुमकिन नहीं है | अगर हम यहां वर्तमान समय में सरकार की योजनाओं पर ध्यान दें, तो इनमें ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जो केवल कुछ समुदायों के लिए लाभप्रद रहीं, एवं अतिरिक्त लोगों के लिए वे बस राजनीतिक चालें बनकर रह गयीं | 

वर्ष 2016 में सरकार द्वारा नोटबंदी कराई गई, जिसमें आम जनता को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, और कुछ को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी, लेकिन इस नीति का कोई शक्तिशाली प्रभाव देखने को नहीं मिला | इसके बाद अभी पिछले वर्ष कई वर्षों से रुका हुआ राम मंदिर बनने का प्रस्ताव पारित हुआ, जो कि वाकई सराहनीय है, लेकिन इससे केवल हिन्दू समुदाय को लाभ मिलेगा और कुछ सरकारी धनकोष को | इनके अलावा इस योजना का कोई सफल परिणाम नहीं है | ऐसे अनगिनत उदाहरण मिल जायेंगे, जो स्वतंत्रता के बाद से हमारे देश में लागू किये जा रहे हैं, लेकिन उनके प्रभाव अधिक समय तक लोगों की प्रसन्नता का कारण नहीं बन पाते | ऐसा नहीं है कि सरकार की सभी नीतियाँ हानिकारक हैं  लेकिन कुछ कदम सरकारें ऐसे उठाती हैं, जिससे लोगों में उनके प्रति अरुचि पैदा हो जाती है | 2014 से पहले गाँधीवादी नेताओं ने अनेक वर्षों तक भारत पर शासन किया लेकिन अंत में घोटालों के विवादों में फंसकर लोगों का समर्थन खो बैठे | यही समय था, जब लोगों को वर्तमान सरकार की योजनाएं अपने हित में लगीं और भाजपा पार्टी को शासन करने का मौका दिया | परन्तु आज की स्थिति देखते हुए लोग अब इनसे भी मुँह मोड़ते दिखाई दे रहे हैं | बढ़ती हुयी बेरोजगारी, छात्रों का अंधकारमय भविष्य, किसानों की लाचार स्थिति भारत को विकास के पथ से पीछे धकेल रही है | लेकिन यहां यह  कहना गलत होगा, कि देश की यह स्थिति अत्यधिक लोकतंत्र का कारण है | 

लोकतंत्र ही विकास का सर्वश्रेष्ठ विकल्प है 

लोकतंत्र भारतीयों की पहचान है | इससे हमारे स्वतंत्र चरित्र का निर्माण होता है, एवं यह समस्त देशवासियों को आत्मनिर्भर बनाता है | वह हमारा लोकतंत्र ही है, जो इतनी विविधताओं के बावजूद हमें एकता के बंधन में बांधता है | लोकतंत्र के ही कारण आज हमने बुलंदियों को छूने में सफलता पाई है, और भारत को एक श्रेष्ठ देश होने का दर्जा प्राप्त हुआ है | इसलिए अधिक एवं शीघ्र विकास न होने की वजह लोकतंत्र नहीं बल्कि सरकारी योजनाएं और जनता की सोच है | लोगों को यह समझना चाहिए, कि हर विकास का कदम सबको एक साथ, एक समय में प्रसन्न नहीं कर सकता | जैसे सिक्के के दो पहलू होते हैं, ठीक उसी प्रकार हर एक पहल के सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों तरह के प्रभाव होते हैं | ऐसी स्थितियों में सरकार को अधिक लाभों वाली योजनाओं का गठन करना चाहिए एवं आम जनता को भी अपने स्वार्थ, राजनीतिक बुराइयों से अलग हटकर सरकार की नीतियों को सफल बनाने में सहयोग देना चाहिए | जैसे अभी हाल ही में जब कोविड -19 महामारी को रोकने की पहल में प्रशासन ने टीकाकरण की प्रक्रिया की शुरुआत की थी तब विरोधी दलों ने आम जनता को अफवाहों के घेरे में डालकर उनकी ज़िंदगियों को मुश्किल में डाल दिया था | ऐसे में जो देहात के अशिक्षित एवं घरेलू लोग हैं वो आज भी टीकाकरण से डर रहे हैं | अर्थात, लोगों को अपने ओहदों से बाहर निकलकर देश के हित के बारे में सोचना चाहिए और “सबका साथ सबका विकास” की मुहिम के माध्यम से देश को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए | ऐसा करने में लोकतंत्र हमारी सबसे बड़ी ताकत है, और यह व्यक्तिगत तौर पर विकास को बढ़ावा देता है | इसलिए हर व्यक्ति को सकारात्मक सोच रखकर लोकतंत्र को विकास की मिसाल बनाने में सहयोग देना चाहिए क्योंकि “हम लोकतंत्र से नहीं हैं बल्कि लोकतंत्र हमसे है |”

Comments