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“विर्जिनिटी ” पवित्रता की मोहर?

Aduiti Shreya

ByAduiti Shreya

Oct 17, 2020

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woman crossing her arms while looking at the camera

लड़की हो तुम ,
हो तुम घर की लाज |
देनी है पवित्रता की परीक्षा तुम्हे ,
जिस दिन होगी तुम्हरी मांग लाल ।

विर्जिनिटी जिसे हम आम तोर पर ” सील होना ” भी कहते है । विर्जिनिटी हमारे समाज में कभी था ही नहीं , आदम और ईव के युग के दौरान , तत्कालीन मनुष्यो ने जातिविभाजन कर नर तथा मादा जाती की स्थापना की । जहा नर जाती को उनके शक्ति के लिए जाना जाता था , तो वही मादा जाती को जननि के तोर पर देखा जाता था ।इसी प्रकार संसार का संचालित होता रहा और फिर आया सिनेमा और किताबो का दौर का दौरे । किसी जमने में मुस्लिम महिलाओ को अशिक्षित इसलिए रखा जाता था क्योकि , वह उर्दू रोमांस की किताबो को पढ़ कर खुद को चरित्र हिन् कर सकती थी | फिर आया फिल्मो का दौर , फिल्मो ने इस तरह लोगो की मानसिकता को नियंतरित किया की लोग फिल्मो को असल ज़िन्दगी से जोड़ने लगे ।
80 और 90 के दशाल में फिल्मो में भारतीय नारी को संस्कारी ,सभ्यावान,आज्ञाकारी के रूप में दर्शाया जाने लगा ,और इस का प्रभाव भारतीयों की आम ज़िन्दगी पर बखूबी पड़ा ,हर भारतीय परिवार अपने घर में आदर्श और आज्ञाकारी बहु की तलाश करता रहा | जहा पहली रत बिस्तर लाल न होने पर उस नई दुल्हन को रस्ते में खड़ा कर दिया जाता था ,उस मासूम को सड़क किनारे रोने छोड़ दिया जाता था । क्या होता होगा उस मासूम का हाल, जिसने देखि नहीं थी दुनिया दारी । बिस्तर लाल न होने का मतलब अपवित्र कैसे माना जा सकता है , जबकि विज्ञानं मानता है की 75 % औरतो में हैमेन टूटने पर रक्त का बहाव होता है । कौन समझे इन मर्दो को जो अपनी इज़्ज़त कही पर भी नीलम कर आजाते है ,जो इतना भी नहीं समझते की हैमेन की मौजूदगी पवित्रता की मोहर नहीं होती , यह हैमेन एक पतली सी झिली होती है, और यह झिली नाचने से घुड़सवारी करने से साइकिल चलने से टूट जाती है |

आज के दौर में जहा आजादी , नारी शशक्ति करण की बात होती रहती है , क्या इन सारि बातो से घिरी नारी को इतना भी हक़
नहीं है की वो अपने शरीर के साथ जो चाहे वो कर सकती है | क्यों उसे दो उंगली परीक्षण से गुजरना पड़ता है ,जो की कानून के नज़रो में न केवल अवैध है बल्कि दंडनीय अपराध भी है |क्यों अरेंज मैरिज में 78 % पुरुषों की मांग वर्जिन लड़की होती है | क्या जो लड़की वर्जिन नहीं है उसे शादी करने का कोई हक़ नहीं है | पुरषो की सोच को तृप्त करने हेतु विज्ञानं ने लड़कियों को वापस वर्जिन बनाने का ठेका ले कर ब्लड कैप्सूल, हाइमन प्लास्टिसिटी , आर्टिफीसियल हैमेन जैसे चीज़े बाजार में उपलब्ध करा दी है |

इस झिली का महत्व इंडिया में ही नहीं बल्कि विदेशो में भी काफी है ,अमेरिका में एक बात प्रचलन में है “नो हैमेन नो मर्रिज ” जिसका साफ मतलब होता है , की हैमेन की अनुपस्थति में आपकी शादी होना अस्मभव है | ऐसी बातें महिला को न केवल अपमानित करती है , बल्कि औरत को एक वस्तु के तोर पर भी दर्शाती है साथ ही पुरषो को प्रधान साबित करती है ।

अफ्रीका में आज भी कुछ देश ऐसे है जो आज भी राज-तंत्र पर चलते है ऐसा ही एक देश है स्वाज़ीलैंड जो की रिपब्लिक ऑफ़ साउथ अफ्रीका और मोजांबिक से घिरा है । यहाँ की प्रथा के अनुसार राजा हर साल एक वर्जिन लड़की से शादी रचता है और शाशक को सालाना शादी करना अनिवार्य है जबतक वह शाशक के पद को त्याग न दे । इसके लिए हर साल शाही महल में आयोजित पारंपरिक शुद्धता परेड आयोजित किया जाता है और भाग लेने वाली हजारों महिलाओं / युवतियों में से राज को एक एक नई दुल्हन का चुनाव करना पड़ता है ।

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