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काश के हम होश में अब आने न पाए

Aduiti Shreya

ByAduiti Shreya

Dec 2, 2020

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man sitting on gray dock


आप कोन हैं ? आप क्यों हैं ? आप इस आडम्बर रूपी समाज का हिंसा क्यों हैं ?
यह सारी बातें आपको अकेले पन में याद आती होंगी ।यह सारी बातें आपको रुलाती भी होंगी ।आपको अक्सर लगता होगा की काश ज़िन्दगी थोड़ी और हसीन होती । थोड़ी और दिलचस्प होती । काश मेरे पास करोड़ो रुपय होते ।काश में भी ऐसा होता – काश में वैसा होता । इस काश का कोई अंत नहीं होता , यह काश असीम हैं ।
यह काश शब्द आपके हर समस्यो का जड़ हैं । इस शब्द को जितनी जल्द हो सके अपने जीवन से विलुप्त कर दे उतना अच्छा । अगर आप इस काश को परे रख कर , बस यह सोचे की ” ईश्वर कितना महेरबान हैं वह मुझे अपने बच्चे जैसा रखता हैं “। मुझे दरिया में उतार देता हैं ताकि में इस दरिया रूपी संसार में तैरना सिख सकू । इस दरिया में डूबते सम्हलते अपनी गलतियों से सिखु । वह अपनी छड़ी से मुझे दण्डित भी करता हैं , ताकि मेरे सम्हलने में गलती से भी कोई गलती न हो जाए।
मेरा ईश्वर मुझसे कितना प्यार करता होगा , कितना दुलार करता होगा , जो उसने यह सारी सुख सुविधा प्रदान करता हैं । वह ईश्वर नहीं मेरा पिता हैं , जिनका में हिस्सा हु , जिनका हिस्सा शरीर में आत्मा के रूप में विराजमान हैं ।

वह पिता ,परमात्मा कितना अच्छा हैं , में जब उसे याद करता हु तो मुझे परम सुख की प्राप्ति कराता हैं । जब में उसके दर पर अपनी ज़िद लेकर जाता हु , तो मेरा परम पिता परमात्मा मेरी ईक्षा किसी न किसी रूप में पूरी करता हैं । अत्मनिर्भरता का एक मात्र रास्ता हैं ,स्वः को समझना और उस स्वः को समझते ही आप अपने स्वः यानि अपनी आत्मा से परमात्मा को जोड़ लेते हैं ।

आत्मा निरंकारी हैं , उसमे संस्कार आपको डालने हैं । यह आत्मा एक पेन ड्राइव जैसी होती हैं , आप इसमें जो संस्कार डालेंगो आपका व्यक्तित्वा वैसा ही होते जाएगा । आत्मा वही ग्रहण करती हैं जो आप उससे सिखाते हैं , आप पॉजिटिव सोचेंगे तो पॉजिटिव होते जाएगे , उसी प्रकार जब आप मनुष्यो अवं पशुओ से स्नेह अवं सेवा भाव रखेंगे तो आपको भी बाकि जीवो से सामान मात्रा में प्रेम अवं स्नेह की प्राप्ति होगी ।
यदि आप अपनी आत्मा को कण्ट्रोल में रखेंगे , उसमे पाजिटिविटी , लव, डिवोशन , रेस्पेक्ट जैसे भावो से भरेंगे , तो आपकी आत्मा स्वयं खुद ब खुद पॉजिटिव फील करने लगेगी, उसे संतुष्टि की प्राप्ति भी होने लगी । आप थोड़े में संतुष्टि पाना सिखने लगे गे ।
यह पाजिटिविटी ,लव जैसी चीज़े कैसे आएगी ? कहा से आएगी ? यह सारी चीज़े तभी आएगी , जब आप खुद को उस परम पिता परमात्मा से जोड़ना होगा । आपका परम पिता आपमें अपने संस्कार देगा , और उस आत्मा – परमात्मा के कनेक्शन के लिए हमें मैडिटेशन , करना होगा , अपना ध्यान केंद्रित करना होगा । जब आप सामजिक मोह से थोड़ी देर ही सही दूर रहे गे और खुद के अंदर झाके गे, तो आपको स्वयं ही उस परम पिता परमेश्वर से एक कनेक्शन महसूर होने लगे गा ।वह आपके हर सवाल का जवाब किसी न किसी रूप में देने लगेंगे । आखिर आप उसकी संतान जो हो ।
इस आत्मा परमात्मा का खेल अप्रम पार हैं , और जो इस खेल मे अव्वल आया उसे परम सुख अवं शांति की प्राप्ति होती हैं ।

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