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शब्दों के बाण का अंजान परिणाम

Arpana Kumari

ByArpana Kumari

Oct 9, 2020

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fountain pen on spiral book
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लोग अक्सर कहा करते हैं कि अपने विचारों को दूसरों तक पहुचाना हमारा कर्तव्य है। जो यह कहते हैं सही कहते हैं। और हम यह भी जानते हैं कि हमें कुछ कहने की पूरी आज़ादी है। पर एक चीज़ जो लोग अक्सर भूल जाया करते हैं, वो है सही जगह पर सही शब्दों का प्रयोग करना।

हमें यह समझना ज़रूरी है कि शब्द बाण की तरह होते हैं। जिस तरह बाण कमान से छूटकर वापस नहीँ आ सकते, उसी तरह कहे जा चुके शब्द अनकहे नहीँ किये जा सकते।

कबीर दास जी ने कहा था :

ऐक शब्द सुख खानि है, ऐक शब्द दुख रासि।
ऐक शब्द बंधन कटै, ऐक शब्द गल फांसि।।

इसका अर्थ है :
एक शब्द सुख की खान है और एक ही शब्द दुखों का कारण। एक ही शब्द जीवन के समस्त बंधनों से मुक्त करने की क्षमता रखता है और वही एक शब्द गले की फाॅंस बनकर रह जाता है।

शब्दों का हम पर असर

हम कभी इस बात पर गौर नहीँ करते और ना ही इस विषय पर अधिक सोचते हैं, कि शब्दों से हमारे दिमाग पर कितना असर पड़ता है।
हम अगर शान्ति, सुन्दरता और अच्छाई की बातें सुनें और बोलें तो हमारा दिमाग अपनेआप अच्छा काम करने के लिए प्रेरित होता है। हमारे मन में शान्ति की भावना आती है। हमारे खयाल सकारात्मकता की ओर जाते हैं। और हम दूसरों के लिए भी अच्छा सोचते हैं। वहीँ बुरे शब्दों का इस्तेमाल करने से या नकारात्मक शब्द सुनने से हमारा दिमाग चिन्ता कि ओर चला जाता है। और अच्छे विचार सोचने की क्षमता खोने लगता है।

यह मैं नहीँ कह रही, यह विज्ञान ने बताया है। वैज्ञानिक रूप से यह साबित किया जा चुका है कि नकारात्मक शब्द हमारे दिमाग को चिंतित करते हैं और हमारे कर्मों को प्रभावित करते हैं। और क्या पता आज देश भर में जो क्रूरता दिखाई दे रही है, उसका एक कारण यह भी है। आजकल मीठी वाणी बोलने वाले बहुत कम लोग बचे हैं। शायद इसी वजह से अच्छे काम करने वाले भी कम ही लोग हैं।

एक सलाह

हमें हमेशा ध्यान रखना चाहिए इस बात का कि हम किस तरह के शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। हमें इस बात से वाकिफ़ होना चाहिए कि कहीँ हम जाने अन्जाने में किसीका दिल तो नहीँ दुखा रहे, या हमारे शब्द किसीको तकलीफ तो नहीँ हो रहे। आपको लगे या ना लगे पर कहीँ सुनने वाले को आपके शब्द चुभते तो नहीँ?

तुम क्या जानो
तुमने कितनों को रुलाया है।
तुम क्या जानो
तुमने कितनों को अपमान से नहलाया है।
तुम क्या जानो
तुम्हारे कठोर शब्द सुनने वाला
कितनी ही रात सो पाया है।”

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